Newspost, Motivation/Spiritual Desk. Presenter- Swami Dayanand Sharma.
10% संघर्ष मतभेद के कारण और 90% संघर्ष 'वाणी के कठोर लहजे के कारण' होते हैं। लक्ष्य अगर सर्वोपरि है, तो फिर आलोचना, प्रशंसा या विवेचना कुछ भी मायने नहीं रखते। अच्छे किरदार, अच्छे संस्कार, और अच्छे विचार वाले लोग हमेशा साथ रहते हैं, दिलों में भी, वाणी में भी और प्रार्थना में भी।
जब पैसा आता है तो, आंखें सपनों से भर जाती हैं, पर यही सपने अक्सर अपनों की सच्चाई को धुंधला कर देते हैं। याद रखना दौलत नहीं, अपनापन ही जीवन की असली दौलत है। जो प्राप्त है वो ही पर्याप्त है। अवस्था भले ही दीन-हीन हो या समृद्ध और संपन्न, अपने ईश्वरत्व पर हर हाल में टिके रहना है, यही मूलमंत्र है।
कायर और वीर में मात्र एक अंतर है। कायर समस्या गिनाएगा और समस्याओं को गिनाने का कोई अंत नहीं दिखेगा। वीर समस्या पर समाधान रखेगा, समस्या पर अटका नहीं रहेगा। इस जीवन में जीने से अधिक मरने के क्षण आएँगें, हमें उनमें भी जीना है। जीवन में सिर्फ़ ऐसे लोगों को चुनना है जो हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छे हो।
सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल

कभी धूप से परेशां, कभी ठंड से गिला।
हैं बेशुमार शिकवे , इंसान की फितरत में।
मालिक ने जो दिया है, उसपे यकीं नही।
नखरें बेहिसाब हैं , इंसान की फितरत में।✍🏻दयानन्द
