Newspost, National Public Desk. Singrauli, MP.

सिंगरौली, मध्य प्रदेश के सबसे पुराने व व्यवस्थित शहर जहां कोल इंडिया लिमिटेड की कंपनी एनसीएल का मुख्यालय भी स्थित है, इस शहर के 35 हजार से अधिक सूचीबद्ध परिवारों को एनसीएल की जयंत एवं दुधीचुआ कोयला खदानों के विस्तार के लिए अधिग्रहित करने की प्रक्रिया कतिपय मुआवजा भोगी लोगों के सांठगांठ में हड़बड़ी में शुरू कर दी गई। शहरी क्षेत्र से विस्थापित हो रहे परिवारों, उनके व्यवसाय, रोजगार, विद्यार्थियों की शिक्षा, नागरिकों के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, मूलभूत नागरिक सुविधाओं, संचार, परिवहन - यातायात, सामाजिक, व्यावसायिक, पर्यावरणीय चिंताओं को दर किनार रखते हुए करीब एक लाख की आबादी को दर बदर करने की योजना पर एनसीएल ने कदम बढ़ाया तो इसका खंड खंड में विरोध भी हुआ। लेकिन स्वेच्छाचारी अधिग्रहण प्रक्रिया के बीच अब आम जनमानस भीतर से सुलगता प्रतीत हो रहा है।

नेताओं को साधकर जनता को दर बदर करने की योजना -

लोगों का कहना है कि अल्प समय में ही जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और विरोध करने वाले स्वयंभू नेताओं को एनसीएल ने साध ही नहीं लिया, उन्हें अपना पिछलग्गू बना लिया है। अब ये लोग उन्हीं की बोली बोलते हैं। अब तक बांटे गए मुआवजों में भारी अनियमितता है। सर्वे में अपने करीबियों को अनैतिक लाभ और सामान्य लोगों के जायज़ हक पर कैंची चलाई गई है। बाजार और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। इस शहर पर आश्रित लोगों की आजीविका को लेकर कहीं भी संवेदनशीलता नहीं दिखाई देती। स्कूल कॉलेजों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य, लोगों का स्वास्थ्य सबकुछ दांव पर लगा दिया गया है।

आई कुछ राहत देने वाली खबर...

कलेक्टर गौरव बैनल ने कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित एनसीएल प्रतिनिधियों की बैठक के दौरान जो निर्देश दिए हैं वे कुछ राहत पहुंचाने वाले जरूर हैं। लेकिन संवेदनशील कलेक्टर श्री बैनल को स्वयं संज्ञान लेकर पीढ़ियों से बसे हजारों परिवारों के अस्तित्व और उनके भविष्य की चिंता करनी होगी। हालांकि उन्होंने निर्देश दिए हैं कि विस्थापित होने वाले लोगों को चिन्हित पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन (R & R) कॉलोनियों में निर्धारित शर्तों के अनुरूप समुचित व्यवस्था उपलब्ध कराते हुए विकास कार्य पूर्ण कर प्लॉट अथवा आवास आवंटित किए जाएं। बैठक में एनसीएल के अधिकारियों ने विस्थापन से संबंधित अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी दी। बताया गया कि एनसीएल ब्लॉक-बी क्षेत्रांतर्गत लगभग 44.50 हेक्टेयर क्षेत्र में आर. एण्ड आर. कॉलोनी स्थापित करने के लिए करीब 1750 प्लॉट चिन्हित किए गए हैं। कॉलोनी तक पहुंच मार्ग की व्यवस्था की जा चुकी है तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स और जलापूर्ति जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास कार्य 20 मार्च से प्रारंभ किए जाने की योजना है।

पारदर्शी हो विस्थापन की पूरी प्रक्रिया - कलेक्टर

कलेक्टर बैनल ने निर्देश दिए हैं कि विस्थापन की पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संचालित की जाए, जिससे पात्र परिवारों को निर्धारित शर्तों के अनुरूप सभी लाभ मिल सकें। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को समय पर मुआवजा भुगतान सुनिश्चित किया जाना चाहिए तथा चिन्हित पुनर्वास कॉलोनियों में समुचित विकास कार्य कर आवासीय प्लॉट उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पुनर्वास स्थल शहर के नजदीक हो और वहां तक सुगम पहुंच मार्ग उपलब्ध हो।

Real Estate Developer से कॉलोनियों को कराएं विकसित -

कलेक्टर ने एनसीएल को निर्देशित किया कि विस्थापन की प्रक्रिया संयोजित एवं व्यवस्थित तरीके से पूरी की जानी चाहिए, ताकि क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का निर्माण न हो सके। कलेक्टर ने यह सुझाव भी दिया कि निजी भूमि चिन्हित कर बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स के माध्यम से R & R कॉलोनियों का विकास कराया जा सकता है, जिससे सभी विस्थापित परिवारों को एक ही स्थान पर मूलभूत सुविधाओं का लाभ मिल सके।

अन्य वैकल्पिक स्थलों को ढूढ़े एनसीएल -

इसके अलावा टाउन प्लानिंग के तहत प्राधिकरण द्वारा चिन्हित क्षेत्रों की प्लॉटिंग कराए जाने पर भी जोर दिया गया, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास के साथ-साथ प्राधिकरण की आय में वृद्धि हो सके। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चिन्हित स्थलों के अतिरिक्त अन्य वैकल्पिक स्थानों की भी तलाश की जाए, ताकि पुनर्वास कार्य को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके।

शहरी क्षेत्र में हो पुनर्वास कालोनी - निर्देश

उक्त बैठक में कलेक्टर ने एनसीएल के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि विस्थापन की प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ की जाए। मुआवजे का सही भुगतान तथा यह सुनिश्चित करें कि आरएनआर कॉलोनी शहर के नजदीक हो तथा पहुंच मार्ग उपलब्ध हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि विस्थापन प्रक्रिया संयोजित तरीके से किया जाय, ताकि क्षेत्र में किसी भी अवैध कॉलोनी का निर्माण न हो सके।

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