Newspost, National Desk. Singrauli/ New Delhi.
#देश के कई चर्चित क्रांतिकारी नेता उतर सकते हैं मैदान में
आंदोलन से राष्ट्रीय – अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जा सकता है विस्थापन का मुद्दा
सिंगरौली के नाम से प्रचलित, नगर निगम के मोरवा ज़ोन में स्थित शहर को दो कोयला खदानों जयंत व दुधीचुआ के विस्तार के लिए अधिग्रहण की प्रचलित प्रक्रिया अधिसंख्य लोगों की समझ से परे है। अब तक स्थानीय संघर्ष मंचों द्वारा कोल इंडिया की कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के मुख्यालय और जयंत की खदान के समीप आंदोलन किया गया था। इन मंचों द्वारा एनसीएल की विस्थापन नीति को एकांगी, अमानवीय और दोहरे मापदंड का बताया गया। लेकिन जब अपेक्षित समाधान नहीं हुआ, तब सिंगरौली विस्थापित संघर्ष समिति के द्वारा बड़े संघर्ष का खाका बुना गया है। बताया जा रहा है कि आगामी दिनों में एनसीएल मुख्यालय पर एक बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है।
आंदोलन का हो सकता है बड़ा असर
यदि यह आंदोलन हुआ तो एनसीएल प्रबंधन के मंसूबों को तगड़ा झटका लगने की पूरी संभावना है। तब सबसे बड़े शहरी विस्थापन का यह मुद्दा राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक जा सकता है। ग्लोबल मीडिया इसका संज्ञान ले सकती है और विरोधी राजनीतिक पार्टियां भी इससे जुड़ सकती हैं। बहुस्तरीय आंदोलन खड़े हो सकते हैं। साथ ही एनसीएल की विस्थापन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
चल रही है तैयारी
सिंगरौली विस्थापित संघर्ष समिति के सूत्रों के अनुसार, सिंगरौली (मोरवा) शहर के विस्थापन लिए एनसीएल दोहरे मापदंड की नीति पर चल रही है। एनसीएल प्रबंधन को बार बार अवगत कराने के बाद भी उन पर कोई असर नहीं पड़ा। इसी वजह से एक बड़े आंदोलन की तैयारी चल रही है। एनसीएल के अड़ियल रवैया के विरोध में यदि बड़ा आंदोलन हुआ तो उसके लिए कंपनी स्वयं जिम्मेदार होगी।
आंदोलन में इनके शामिल होने की संभावना
यदि आंदोलन होता है तो उसमें बक्सर के लोकसभा सांसद सुधाकर सिंह, सोशल वर्कर व बड़े आंदोलन में सक्रिय भूमिका अदा करने वाली मेधा पाटेकर, राष्ट्रीय किसान मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश टिकैत, राष्ट्रीय महासचिव डा. सुनीलम, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अधिवक्ता आराधना भार्गव आदि शामिल हो सकते हैं। इन लोगों के अपने समर्थकों के साथ सिंगरौली आने की चर्चा चल रही है। दूसरी ओर सिंगरौली विस्थापित संघर्ष समिति अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। दूसरी ओर एनसीएल प्रबंधन भी अपने रुख पर अड़ा हुआ है। फिलहाल धुरंधरों की मौजूदगी में संभावित आंदोलन और उसके परिणाम की प्रतीक्षा उजाड़े जाने वाले करीब एक लाख शहरियों को रहेगी।

https://shorturl.fm/w9e4H