भारत सहित दुनिया के अन्य देशों में विस्तारित विश्व का सबसे बड़ा सामाजिक सांस्कृतिक संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ ने गत विजयदशमी को अपनी स्थापना का १०० वर्ष पूर्ण किया है। शताब्दी वर्ष पर अनेकानेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन्हीं में सम्मिलित है- ‘सप्तशक्ति’ कार्यक्रम।
आपको जिज्ञासा हो रही होगी कि संघ का यह सप्तशक्ति कार्यक्रम वास्तव में है क्या???
आइए हम बताते हैं कि ये ‘सप्त’ अर्थात ‘७’ शक्तियां हैं क्या !!! क्या है ‘सप्तशक्ति संगम’…
यह कार्यक्रम पौराणिक कथाओं में वर्णित नारी की सात शक्तियों - कीर्ति, श्री, वाक्, स्मृति, मेधा, धृति और क्षमा से प्रेरित है।
- नारी सशक्तिकरण और जागरण: महिलाओं की भीतर की शक्ति को जागृत करना और समाज में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करना।
- परिवार और संस्कार: ‘कुटुंब प्रबोधन’ जैसे विषयों पर महिलाओं को जागरूक करना ताकि वे परिवार और बच्चों को संस्कारवान बना सकें।
- पर्यावरण संरक्षण: महिलाओं को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनाना और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना।
- स्वदेशी और आत्मनिर्भरता: स्वदेशी उत्पादों और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना।
- भारतीय संस्कृति और मूल्य: पाश्चात्य प्रभाव का मुकाबला करते हुए, पारंपरिक भारतीय मूल्यों, जैसे ‘मातृ देवो भव’, को बढ़ावा देना।
- सामाजिक समरसता: समाज में एकता और सहयोग की भावना को सशक्त बनाना। Courtesy -Google
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सरस्वती उ मा वि झिंगुरदा में भव्य रूप में संपन्न हुआ सप्तशक्ति कार्यक्रम
सिंगरौली, मध्य प्रदेश, संवाददाता। सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय झिंगुरदा में सप्तशक्ति कार्यक्रम को भव्य ढंग से आयोजित किया गया। इस दौरान विद्यालय की बहनों ने रंगारंग कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर अतिथियों एवं सभी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। भारतीय संस्कार, मातृशक्ति के शौर्य एवं परिवार प्रबोधन पर आधारित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में श्रीमती आशा ज्योति, स्टाफ अधिकारी (मानव संसाधन), एनसीएल झिंगुरदा क्षेत्र रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती ममता सिंह ने किया। इस अवसर पर 170 मातृशक्ति की उपस्थिति रही।
वक्ता के रूप में सुश्री प्रिया वैश्य द्वारा कुटुंब प्रबोधन एवं पर्यावरण विषय पर अपना विचार व्यक्त किया गया। गत सत्र की विद्यालय की टॉपर रहीं सुश्री अन्नू यादव ने भारत के विकास में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला। संयोजिका श्रीमती प्रमिला राव द्वारा उपस्थित मातृशक्तियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम का आयोजन प्राचार्य जेएन शुक्ल के मार्गदर्शन में किया गया। संचालन सुश्री रूपा त्रिपाठी ने किया।
ऐसे कार्यक्रम भारतीय परिवार संस्था को पुनर्स्थापित करने, मातृशक्ति को उनके वास्तविक शक्ति को परिचित कराने, पर्यावरण, देश के अर्थतंत्र को संवृद्ध करने, भावी पीढ़ी को संस्कारवान तथा शीलवान बनाने के उद्देश्य को लेकर चलाए जा रहे हैं।

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