??? ॐ नमो भगवते वासुदेवाय???
Newspost, Shared by- Swami Dayanand Sharma.
बीजं मां सर्वभूतानां विद्धि पार्थ सनातनम्।
बुद्धिर्बुद्धिमतामस्मि तेजस्तेजस्विनामहम्।।7.10।।
हे पार्थ! मुझे तू सब भूतोंका सनातन पुरातन बीज अर्थात् उनकी उत्पत्तिका मूल कारण जान। तथा मैं ही बुद्धिमानोंकी बुद्धि अर्थात् विवेकशक्ति और तेजस्वियों अर्थात् प्रभावशाली पुरुषोंका तेज प्रभाव हूँ।
दैवी ह्येषा गुणमयी मम माया दुरत्यया।
मामेव ये प्रपद्यन्ते मायामेतां तरन्ति ते।।7.14।।
यह दैवी माया अर्थात ईश्वरकी निज शक्ति "त्रिगुणमयी माया" (सतोगुणी,रजोगुणी और तमोगुणी) दुस्तर है अर्थात् जिससे पार होना बड़ा कठिन है ऐसी हैं। इसलिये जो सब धर्मों को छोड़कर मुझ मायापति परमेश्वर का ही सर्वात्म भाव से शरण ग्रहण कर लेते हैं वे सब भूतोंको मोहित करने वाली इस माया से तर जाते हैं।
न मां दुष्कृतिनो मूढाः प्रपद्यन्ते नराधमाः।
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिताः।।7.15
दुष्कृत्य करने वाले, मूढ, नराधम पुरुष मुझे नहीं भजते हैं। माया के द्वारा जिनका ज्ञान हर लिया गया है, वे आसुरी भाव को धारण किये रहते हैं।
??आपका दिन मंगलमय हो ।??
