📌इस स्कूल के बच्चों ने दिया इसका जवाब…

📌सरस्वती शिशु मन्दिर विन्ध्यनगर में मनाया गया तुलसी जयन्ती समारोह

Newspost, Editorial Desk @RohitGupta

महर्षि वाल्मीकि के संस्कृत में लिपिबद्ध महाकाव्य ‘रामायण’ की लोकप्रियता और उसकी सामाजिक उपादेयता तब संभवतः एक रूढ़िगत सोच और सामान्य जन की संस्कृत भाषा से अनिभिज्ञता के कारण दीर्घ काल तक नहीं बन सकी होगी। तब भारतीय समाज में आदर्श जीवन को सकारात्मक सिद्धांतों के साथ जीने का सही मार्गदर्शन करने के लिए जो अभाव था, उसे पवित्र सुरसरि गंगा के पावन अस्सी तट पर श्रावण, शुक्ल पक्ष की सप्तमी को शरीर धरने वाले महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने ठेठ अवधी बोली में अपने महाकाव्य ‘श्रीराम चरित मानस’ की रचना कर दी। इस महाग्रंथ ने न केवल तत्कालीन समाज को एक सही दिशा दिया, वरन् सामान्य चलतू बोली में रचित श्रीराम चरित मानस के दोहे और चौपाइयां हिंदी की विभिन्न बोलियों के सुजान और अपढ़ लोगों के जिह्वा पर ही नहीं, अपितु उनके मानस पर छा गई। इसका व्यापक प्रभाव पड़ा और जनमानस में सदाचार, सद्भाव, प्रेम और भक्ति की रसधार बहने लगी।

तुलसी कृत श्रीराम चरित मानस एक सहज ग्रंथ हैं। गोस्वामी जी ने इन पंक्तियों "सियाराम मय सब जग जानी, करहु प्रणाम जोरि जुग पाणि" में इस महाग्रंथ की मूल भावना को उद्धृत किया है। उन्होंने भेदभाव रहित समरस समाज का चित्रांकन किया है। अपवादों को छोड़ दें तो संभवतः सभी हिन्दू सनातनी घरों में यह ग्रंथ छोटे बड़े आकार में अवश्य ही मिल जाएगा। तब के कालखंड में प्रचलित इस महाग्रंथ और इनके रचयिता तुलसीदास जी की प्रासंगिकता पर इस युग में क‌ई बार कतिपय दोहों को लेकर आलोचना भी की गई। लेकिन इसके साथ ही उन दोहों की विस्तृत व्याख्या भी विद्वानों ने की है। 

इनकी वर्तमान प्रासंगिकता को प्रमाणित करने के लिए, 11 अगस्त, रविवार 2024 को मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के विंध्यनगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र छात्राओं ने तुलसी जयन्ती के पुनीत अवसर को समारोहपूर्वक मनाया। इस अवसर पर सरस्वती शिशु मन्दिर में भगवान श्रीराम जानकी के साथ ही तुलसीदास जी के पूजन के पश्चात् सुन्दर काण्ड का सस्वर पाठ किया गया। 
यहाँ यह बताना भी आवश्यक है कि सिंगरौली के इस विद्यालय के बच्चों में अपनी संस्कृति को लेकर जितनी अभिरुचि दिखाई दी, उसके समानांतर उनका आकर्षण विज्ञान विषयों के प्रति भी दिखा। सुन्दर काण्ड पाठ के पूर्व एन.टी.पी.सी. विन्ध्यनगर के सौजन्य से विद्यालय के 10 भैया (छात्रों) को व्याख्याता मनेन्द्र प्र. पाण्डेय एवं विजय तिवारी के साथ शैक्षिक विज्ञान भ्रमण के लिए भेजा गया। एन.टी.पी.सी. विन्ध्यनगर की वरिष्ठ प्रबन्धक, मानव संसाधन विभाग श्रीमती कामना शर्मा ने भैयाओं के साथ जाने वाले संरक्षक आचार्यों को तिलक लगाकर रवाना किया। विद्यालय के प्राचार्य मुद्रिका प्रसाद दुबे ने यात्रा की शुभकामनाएं दीं।
तुलसी जयन्ती के अवसर पर 'पर्यावरण ईको क्लब विभाग' द्वारा विद्यालय परिसर में एक वृक्ष माँ के नाम योजना के अंतर्गत वृक्षारोपण किया गया। 

ये रहे उपस्थित - 

श्रीमती कामना शर्मा, वरिष्ठ प्रबन्धक, मानव संसाधन विभाग, एन.टी.पी.सी. विन्ध्यनगर, डाॅ. सुशील सिंह चन्देल, जिला सचिव, सिंगरौली, धीर सिंह चौहान, व्यवस्थापक, श्रीमती गायत्री श्रीवास्तव-सह व्यवस्थापक, पुनीत कुमार-कोषाध्यक्ष, मुद्रिका प्रसाद दुबे- प्राचार्य, श्रीमती नीलम गुप्ता- प्रधानाचार्य, अभिभावक, आचार्य परिवार एवं भैया-बहन उपस्थित रहे।

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