🕉️🙏🌹 शुभ प्रभात 🌹🙏🕉️

Newspost, Spiritual Desk, Swami Dayanand Sharma.

      जल समस्त जगत का आधार है। शिव के आठ रूप (पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु,आकाश इन पंचमहाभूतों के साथ सूर्य, चंद्र एवं यज्ञकर्ता ये आठ शिव के रूप हैं।) ही समस्त पर्यावरण का प्रतीक है। इन्ही तत्वों की अंतः क्रिया से समस्त सृष्टि या पर्यावरण का प्रसार हुआ। अतः सभी शिवमय अर्थात मंगलमय हैं।

     अखिल ब्रम्हांड ईश्वर का स्वरूप है। श्रावण मास में बरस रही जलधारा, प्रकृति धरती का अभिषेक करती प्रतीत होती है। प्रकृति की इस क्रिया का अनुसरण मानव भी अपने आराध्य शिवलिंग पर जल चढ़ाकर करते हैं। श्रावण का अर्थ श्रवण से संबंधित है। चूंकि सभी शिवभक्त इस पवित्र मास में भजन, कीर्तन एवं कथाओं को सुनते एवं गुणगान करते हैं जिससे उन्हें अध्यात्म ज्ञान की एवं अभिषेक से शांति व शीतलता की प्राप्ति होती है।

   सावन और साधना के बीच चंचल और अति चलायमान मन की एकाग्रता एक अहम कड़ी है, जिसके बिना परम तत्व की प्राप्ति असंभव है। साधक की साधना जब शुरू होती है तब मन एक विकराल बाधा बनकर खड़ा हो जाता है,उसे नियंत्रित करना सहज नहीं होता।लिहाजा मन को ही साधने में साधक को लंबे धैर्य का सफर तय करना होता है। मन से ही मुक्ति है और मन ही बंधन का कारण है।

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