Newspost, Literature, M.C. Gupta, Lucknow.
भोजपुरी साहित्यिक सांस्कृतिक और लोक संगीत के प्रति समर्पित संस्था “पुरबी बयार” का गठन के बाद उसके पहले संगोष्ठी कार्यक्रम का आयोजन लखनऊ में किया गया। इस अवसर पर संरक्षक- वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र भूषण, श्रीमती मनोरमा लाल व डॉक्टर सुमन दुबे, संस्था के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद्र रसिया, उपाध्यक्ष कृष्णानंद राय, सचिव महेश चंद्र गुप्त ‘महेश’, सांस्कृतिक सचिव श्रीमती सरोज तिवारी ‘आर्यावर्ती’, प्रचार प्रसार सचिव डॉ ममता ‘पंकज’, कोषाध्यक्ष श्रीमती शीला वर्मा ‘मीरा’ शामिल रहे।
गत 14 जनवरी 2024 को संस्था की प्रथम गोष्ठी का आयोजन काव्य सदन, लखनऊ में किया गया जिसमें भोजपुरी के प्रसिद्ध कवियों व काव्य प्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। प्रारंभ में संस्थाध्यक्ष डाॅ० रसिया ने संस्था का परिचय देते हुए उसके उद्देश्यों पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार नरेंद्र भूषण ने की तथा मुख्य अतिथि श्रीमती मनोरमा लाल एवं विशिष्ट अतिथि उदयभान पांडे रहे। मंच सज्जा व माता सरस्वती के छाया चित्र पर पुष्पार्चन के बाद संस्था के सचिव महेश चन्द्र गुप्त द्वारा मां शारदे की सुंदर सरस वाणी वंदना भोजपुरी में प्रस्तुत की गई।

‘माई सरस्वती से अरजिया, रखिह हमनी के ध्यान। गीतिया में अस रस भरी द, कंठे सुर अउर तान।’ तत्पश्चात मां वाणी की एक और वंदना प्रस्तुत करने के लिए कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नरेंद्र भूषण जी से अनुरोध किया गया। उन्होंने मां वाणी से प्रार्थना किया कि 'शारदा मैया पजरे तू आवा तनी, हम कलम कइसे पकड़ीं सिखावा तनी। हम अन्हारे में बाड़ीं सुझाई न दे, का करीं जाईं केहर बुझाई न दे, ज्ञान सूरज अकासे उगावा तनी। केतना भाषा ई दुनिया में देखा चलल, अउरी भाषा में कइयों विधा हव भयल, भोजपुरियन के आगे बढ़ावा तनी। इसके बाद मंचासीन महानुभावों को माल्यार्पण द्वारा सम्मानित किया गया। इस काव्य संध्या के प्रथम पुष्प के रूप में श्री मती सरोज तिवारी आर्यावर्ती ने सुनाया 'काहे के कइले बाबूजी हमरा बियाह।' उन्होंने ब्याह कर दूसरे के घर जाने की वेदना को बहुत ही भावपूर्ण ढंग से व्यक्त किया। वेदना व्यक्त करते समय उनका गला रुंध गया और पूरा सदन भावुक हो उठा। मुख्य अतिथि मनोरमा लाल ने सदन को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने ऐसे कार्यक्रम का हिस्सा बनने पर खुशी जाहिर की और कहा कि भोजपुरी को पसंद करने वाले साहित्यकार यदि दस रचनाएं खड़ी बोली में तो कम से कम एक रचना भोजपुरी में अवश्य लिखें।

इसके पश्चात काव्य पाठ के लिए बुलाया गया संध्या त्रिपाठी जी को। उनकी रचना का सार था, ‘प्रभु राम को राम के काम से जाना जा सकता है और राम नाम सारे संकटों को दूर कर देता है।’ इसके बाद काव्य पाठ हेतु आहूत लोकेश त्रिपाठी ने सुनाया कि ‘प्रभु राम की पूजा व भजन से ही अब आचमन हो रहा है।’ उन्होंने आगे सुनाया कि ‘जो राम नाम में लीन हो जाता है उसके रास्ते के पत्थर सुमन हो जाते हैं।’ इसके बाद सुकवयित्री अलका अस्थाना ने पुरबी बयार के जन्मोत्सव पर पढ़ा, ‘जनमल हौ पुरबी बयरिया, सारी सखियां गाओ पुरबी बयार बा।’ इसके बाद काव्य पाठ करने आयीं उच्च न्यायालय लखनऊ की अधिवक्ता श्रीमती प्रतिभा सिंह ने भी रामनाम की महिमा का गुणगान करते हुए पढ़ा कि ‘रामनाम ले ल बबुआ जिनगी संवर जाई, भोर हो जाई, राम नाम याद आई।’ उन्होंने एक और गीत सुनाया कि ‘किसान अन्नदाता होवेला, जाई जाई जब्बे जब्बे खेतवा निहारेला।’ तत्पश्चात डॉ विभा प्रकाश ने पहले राम जन्म पर आधारित एक सोहर पढ़ा फिर सुनाया कि ‘माई बाप गुरू जइसन केहू न महान बा, एनही के किरपा से चलेला जहान बा।’ अगले कवि के रूप में आये राकेश सिंह श्रेयस ने सुनाया कि क्षयमुक्त होगा राष्ट्र अपना, स्वस्थ होगी भारती, समृद्धि भी आकर उतारेगी हमारी आरती।’ इसके बाद संचालक ने डाॅ० अगम दयाल जी ने ग्रामीण परिवेश की रचना सुनाते हुए कहा कि ‘कंटवा आ गुलाब हमार गांव।’ आज के काव्य पाठ में देश प्रदेश में चल रही रामनाम की लहर का पूरा प्रभाव छाया हुआ था। वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती शीला वर्मा ‘मीरा’ ने भी रामचरितमानस के प्रसंगानुरूप राम जी से निषादराज की भावना को अपने गीत में समेकित करते हुए पढ़ा कि ‘का देबा गंगा उतराई हो, तनी राम जी बताय दा।’ अब गणित के शिक्षक एवं कवि प्रशांत त्रिपाठी को काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया गया। उन्होंने भी भक्ति भाव से ओतप्रोत रचना पढ़ते हुए सुनाया कि वे शिवभक्त प्रत्येक व्यक्ति के सम्मुख नतमस्तक हैं। वे सदा प्रेमनद में स्नान करने के अभिलाषी रहते हैं। संस्था के उपाध्यक्ष व पर्यावरण संरक्षण तथा सड़क सुरक्षा को जीवन का उद्देश्य बनाकर चल रहे सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि कृष्णानंद राय जी ने सुनाया कि ‘धरती मइया करेली पुकार, हाली हाली पौधा लगावा।’ काव्य सदन तब ठहाकों से गुंजायमान हो गया जब राष्ट्रीय स्तर के कवि श्यामल मजूमदार जी ने अपने हास्य-व्यंग्य के सधे हुए मुक्तक पढ़े। उनका एक मुक्तक था कि ‘पोथी पतरा बांचत हौ, दारू पीके नाचत हौ। करिया आखर भैंस बराबर, तब्बो कांपी जांचत हौ।’ गोष्ठी शनै:शनै: ऊंचाई प्राप्त करती जा रही थी। लखनऊ के वरेण्य कवि रमाशंकर सिंह की ओर गोष्ठी उन्मुख हुई जो रचनाओं को गाकर नहीं पढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि भोजपुरी गीत बिना गाये पढ़ने पर बहुत कम प्रभाव छोड़ती है। उन्होंने इस गोष्ठी में पहली बार अपनी रचना के गायन का प्रयोग किया जो पूर्ण सफल रहा। उन्होंने सुनाया कि ‘राधिका जसोदा से कहेलीं सुन माई रे, बेजइयों बिना कान्हा मोरी धइलैं कलाई रे।’ इसके पश्चात संस्था के सचिव व कार्यक्रम के आयोजक संयोजक महेश चन्द्र गुप्त जी से काव्यपाठ हेतु सदन ने अनुरोध किया गया। सुकण्ठ के धनी महेश गुप्त जी के गीतों को कई गायकों ने गाया है। अभी हाल में एक सुंदर एलबम “चलो अयोध्या धाम”आया है जो बहुत लोकप्रिय हो रहा है। उन्होंने किसान की वेदना कुछ इस प्रकार प्रस्तुत किया कि ‘छाती पीटी रोवेला किसनवां, कहां सूतल बाड़े भगवनवां’ एवं श्रोताओं के अनुरोध पर गीत “आव चल चलीं अयोध्या धाम पियवा” सुनाया। अब तक पूरे समय गंभीर मुद्रा में बैठे रहे रमेश चन्द्र गुप्त ‘भैया’ ने सुनाया कि मैं भी शायर बन जाता। हास्य कवि आशुतोष आशु की भी सहभागिता रही। इसके बाद विशिष्ट अतिथि उदय भान पांडेय जी ने सुनाया कि ‘कान्हा हमके भुलाई दिहला, ब्रज ग्वाल बाल गइया सबके रुलाई दिहला।’ आगे सुनाया कि ‘बनवां से अइलै रघुराई हो, अजोधिया में सोर भईल ननदी। संगवा लखन सिया माई हो नयनवां चकोर भईल ननदी।’ कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए संचालक ने मंच पर आसीन पुरबी बयार के अध्यक्ष तथा लोकप्रिय रसिया इन्टरटेनमेंट यू ट्यूब चैनेल के संस्थापक, संचालक व गायक को काव्य पाठ हेतु आमंत्रित किया। उन्होंने बड़े ही मधुर स्वर में सुनाया कि ‘भजो रे मन राम के नाम मिठाई, जे जे रटेला राम के नाम हो, पारि लगावें प्रभु आई। राम नाम से तरि गई सबरी, तरि गये सदन कसाई।’ तत्पश्चात कार्यक्रम के शीर्ष सोपान पर कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ गज़लकार नरेन्द्र भूषण जी ने नव वर्ष की बधाई देते हुए संस्था के उत्तरोत्तर प्रगति व उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि यदि बचपन के भोलेपन में जीना है तो अपने बचपन की भाषा, बोलचाल में लौटना होगा। उन्होंने कहा कि यह केवल काव्य गोष्ठी ही नहीं संगीतमय काव्यसंध्या थी। उन्होंने सामाजिक संस्था ‘लक्ष्य जनकल्याण समिति’ के पदाधिकारियों एस के वाजपेई, पंकज तिवारी, डीसी गुप्ता की उपस्थिति को गोष्ठी के लिए ऊर्जादायक बताया। उन्होंने चइता धुन में सुनाया कि 'बहताटे पुरबी बयार हो रामा, मन हरसाइल। भोजपुरी के अलग मजा हवे, हिन्दी के ई एक भुजा हवे, टपकेला एकरा से प्यार हो रामा।' अंत में संस्था की सांस्कृतिक सचिव श्रीमती सरोज तिवारी आर्यावर्ती के आभार ज्ञापन के साथ गोष्ठी को अगले कार्यक्रम तक के लिए स्थगित किया गया।
