Newspost, Spiritual Desk. Shared by Swami Dayanand Sharma.
अज्ञान तिमिरान्धस्य ज्ञानाञ्जन शलाकया ।
चक्षुरुन्मीलितम् येन तस्मै श्री गुरवे नमः ॥
🙏🏻🕉️ध्यान मूलं गुरु मूर्ति पूजा मूलं गुरु पदम्।
मंत्र मूलं गुरु वाक्यं मोक्ष मूलं गुरु कृपा॥१॥
वन्दे अहं सच्चिदानन्दं भावातीतं जगदगुरुम्।
नित्यं पूर्ण निराकारं स्वात्मसंस्थितम॥२॥
अखण्डं मण्डलाकारं व्याप्त ये न चराचरम।
तत्पतं दर्शितं येन तस्मै श्री गुरुवे नम:॥३॥
चैतन्यं शाश्वतं शांतं व्योमातीतं निरंजनम्
नादविन्दुकलातीतं तस्मै श्री गुरवे नम:॥४॥
दीक्षा लेना क्यों जरूरी होता है?
समर्थ गुरु अपने शिष्य को सभी बन्धनों से मुक्त करता है, ना कि किसी बन्धन में बांधता है। जो गुरु स्वयं किसी बन्धन में बंधा हो वो हमें क्या बन्धन मुक्त करेगा।

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पूर्ण गुरु वो होता है जो आपके अंतर में उस ईश्वर रूपी प्रकाश को प्रकट कर दे।
आपके दिव्य चक्षु खोल दे और तत्क्षण ईश्वर के दर्शन करवाए।
पूर्ण गुरु आपको ईश्वर का नाद बिना बाहरी कानों के सुनवाएगा।
श्वास में नाम की माला प्रकट कर देगा।
