एनसीएल- शहरी क्षेत्र की लगभग एक लाख आबादी को उजाड़कर असुरक्षित ग्रामीण क्षेत्र भलुगढ़ भेजने पर आमादा, वहीं गोंदवाली रेल के अलावा एनएच 39 बना कोल यार्ड, बगल में है कोल वाशरी
भलुगढ़ के मुहाने पर हाईवे के दो लेन कोलयार्ड में तब्दील, अन्य दो लेन में कोल डस्ट की मोटी परत, एनसीएल की हठधर्मिता और शासन के विभागों पर उठ रहे अनेक सवाल
Newspost, MP Regional Desk.
सिंगरौली, मध्य प्रदेश। कोल इंडिया की अनुषांगिक कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) अपनी दो कोयला खदानों के विस्तार के लिए कतिपय स्वार्थी लोगों की साठगांठ से जिस हठधर्मिता का प्रदर्शन करते हुए अधिग्रहण करने की कवायद तिकड़म से चला रहा है, वह कतई नागरिकों के हित में नहीं है। यह कार्रवाई न तो सत्ता पक्ष के लिये उचित सिद्ध होगी और न ही मोदी सरकार की संवेदनशील जन भावनाओं का पोषण ही करने वाली है। एनसीएल एक ओर व्यावसायिक शहरी वार्डों को कानूनी हिकमत का प्रयोग कर भूमि, भवन व परिसंपत्तियों को औने पौने दरों में हथियाने की चेष्टा कर रही है तो दूसरी ओर यहाँ की शहरी आबादी को चारों ओर से प्रदूषण और आपराधिक गतिविधियों से ग्रसित, नागरिक जीवन एवं व्यावसायिक गतिविधियों के लिए पूरी तरह से प्रतिकूल धुर ग्रामीण क्षेत्र भलुगढ़ में बसाहट देने पर आमादा है।
एनसीएल नगर पालिक निगम सिंगरौली के जिन शहरी वार्डों का अधिग्रहण करने की कवायद कर रहा है, उनमें पीढ़ियों से आबाद लगभग 25000 परिवार एवं करीब 100000 लोगों का जीवन प्रत्यक्ष परोक्ष में चल रहा है। ये नगर निगम सिंगरौली के गठन के समय से ही व्यवस्थित एवं विकसित शहरी वार्ड रहे हैं। यहाँ 3000 से अधिक छोटी बड़ी दुकानें, 9 बैंक, दर्जनों स्कूल 4 कॉलेजों में अध्ययनरत लगभग 16000 छात्र, सभी धर्मों के प्राचीन धर्मस्थल हैं। जबकि भलुगढ़, गोंदवाली से सटा क्षेत्र है जहाँ पश्चिम मध्य रेल जबलपुर ने कोल डंपिंग यार्ड बना रखा है। गोंदवाली से होकर गुजर रही एनएच 39 पर भी कोल यार्ड का कब्जा हो गया है। एनएच 39 के एक पटरी की दो लेन सड़क भी कोलयार्ड का रूप ले चुका है। वहीं सामान्य आवागमन के लिए चालू दूसरी पटरी के दोनों लेन और समूचा इलाका कोल डस्ट का आवरण ओढ़ चुका है। कोयला लोडिंग, अनलोडिंग के लिए दिन रात दौड़ रहे सैकड़ों भारी भरकम वाहनों के कारण रोड में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। सड़क की सभी लेनें और आसपास का इलाका कोल्ड डस्ट से पट चुके हैं। इस सड़क पर आए दिन जानलेवा दुर्घटनाओं की खबरें आती रहती हैं। राहगीर जान जोखिम में डालकर आने जाने को मजबूर हैं।
बता दें कि गोंदवाली क्षेत्र का सफर आए दिन जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क के बीच और पटरियों में बने गड्ढे पूर्णतया धूल के गर्द से पटे हैं। ऐसे में दो पहिया व चार पहिया वाहन चालकों को दिन के उजाले में भी यह कोल डस्ट अक्सर विजिबिलिटी की घोर समस्या को जन्म देता है जो अक्सर प्राण घातक दुर्घटनाओं का सबब बनते हैं। वहीं बारिश का समय शुरू हो गया है और सड़क के बड़े बड़े गड्ढों में पानी भर गया है। ऐसी हालत में वाहन चालकों को पता ही नहीं चलता कि आखिर गड्ढा कहां हैं। इससे हादसों का खतरा और भी बढ़ गया है। दो साल पूर्व शुरू किये गए कोल स्पर साइडिंग व कोल वाशरी से गोंदवाली से लेकर भलुगढ़ गांव तक का इलाका प्रदूषण की जानलेवा मार से पीड़ित हो गया है। स्थानीय ग्राम वासियों को राहत मिलने की कोई उम्मीद दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही है। एनएच 39 की दुर्दशा को लेकर प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की आंखों पर संभवतः कोल उत्पादक व परिवहन से जुड़ी कंपनियों ने मोटी काली पट्टी बांध दी है। उन्हें यह बखूबी पता है कि नेशनल हाईवे के यहाँ की सड़क अब कोलयार्ड बन चुका है।
दिन रात उठता है कोल डस्ट का काला गुबार
गोंदवाली रेलवे कोलयार्ड के बगल से गुजर रही नेशनल हाईवे क्रमांक 39 भी कोलयार्ड में तब्दील हो चुका है। यहां कोयले के लोडिंग और अनलोडिंग से धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। चारों ओर काली धूल फैलने से दिन में ही अंधेरे जैसा महसूस होता है। प्रदूषण से वातावरण पूर्णतया विषाक्त हो गया है। कोल डस्ट से लोग सांस भी ठीक से नहीं ले पा रहे हैं। दूसरी ओर इन गांवों के लोग, यहाँ तक कि बच्चे भी तरह तरह के रोगों से ग्रसित हो रहे हैं।
आंदोलन के लिए बाध्य हुआ एसपीएम:
ऐसे में एनसीएल पर शहरी - व्यावसायिक क्षेत्र के लोगों को धकेलने की अमानवीय एवं अव्यावहारिक योजना पर, रेलवे व प्रदूषण नियंत्रण विभाग पर भारी प्रदूषण से जुड़े तथा एमपीआरडीसी पर एनएच 39 को कोल यार्ड में बदलने देने से संबंधित अनेक सवाल उठ रहे हैं। एनसीएल द्वारा सिंगरौली (मोरवा) शहर के भूमि,भवन के घोषित दर, प्लॉट के एवज ₹ 1 लाख 37 हजार दिये जाने तथा पुनर्वास हेतु भलुगढ़ जैसे असुरक्षित और घातक गांव का चयन करने को लेकर अधिसंख्य लोग चिंतित ही नहीं बल्कि भविष्य को लेकर आतंकित भी दिखाई दे रहे हैं। हालांकि नागरिकों का संगठन सिंगरौली पुनर्स्थापन मंच (एसपीएम) ने एनसीएल को लिखे अपने पत्र में जन भावनाओं का जिक्र करते हुए नगर निगम क्षेत्र में ही बसाहट दिये जाने तथा RFCTLAAR- 2013 के अनुसार मुआवजा देने की मांग की थी। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि एनसीएल ने अपना वही पुराना घिसा पिटा जवाब दिया है। एनसीएल चालबाजी से नापी का काम करा रही है। उनके द्वारा दिए गए उत्तर के वायरल होने के बाद लोगों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। एसपीएम इन मुद्दों को लेकर 24 जुलाई को एनसीएल मुख्यालय का घेराव करने के लिए बाध्य हो गया है। संगठन द्वारा लोगों से अधिक से अधिक संख्या में सुबह 10 बजे एनसीएल मुख्यालय पहुंच कर अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करने की अपील की गई है।
