Newspost, Editorial Desk. @rohitgupta

प्रयागराज महाकुंभ महामेला 2025 ने क‌ई संदर्भों में इतिहास रच दिया है। आस्था के इस महा समागम या संगम में सदियों के बाद सनातन का उफान देखने को मिला। महज 45 दिन में लगभग 04 हजार हेक्टेयर में फैले महाकुंभ क्षेत्र में 66 करोड़ 30 लाख से अधिक सनातनियों, सैलानियों का आना, जात-पांत, वर्ण, पंथ की बेड़ियों को तोड़कर एक साथ डुबकी लगाना, यह भारत के लिए ही नहीं, दुनिया भर के लिए भावी विशेष बदलाव को इंगित कर रहा है।

चुंकी यह 12 कुंभों के योग के बाद 144 वर्षों में आया महाकुंभ था, इसलिए, इस अवसर को जनमानस चूकना नहीं चाह रहा था। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के साथ केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के विभिन्न विभागों- गृह, रेल, सड़क परिवहन, पर्यटन, रक्षा, विदेश सहित अन्य संबंधित विभागों तथा पड़ोसी राज्यों के साथ साझा रणनीति बनाकर इसे ठीक ढंग से संपन्न कराने के लिए पसीना बहाया गया।

श्रद्धालुओं की अपार भीड़ के बीच मौनी अमावस्या पर प्रयागराज में तथा 15 फरवरी की रात न‌ई दिल्ली रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर भगदड़ की घटनाएं भी हुईं। इन घटनाओं में दर्जनों लोगों की मौत हो गई। ये छिटपुट घटनाएं अत्यंत दु:खुद थीं। सरकारों ने उन परिवारों का आंसू पोंछने का भरसक प्रयास भी किया। हम भी उन परिवारों के प्रति अपनी गहन संवेदना प्रकट करते हैं।

क्या विपक्ष के दुष्प्रचार से बढ़ी भीड़ ?

क्या यह कहा जा सकता है कि, मोदी और योगी के साथ साथ सनातन मान्यताओं एवं परंपराओं के घोर विरोधियों द्वारा दुष्प्रचार ने वस्तुत: प्रयागराज महाकुंभ को और भी प्रचारित किया ? आप क्या मानते हैं? अवश्य बताइएगा।

कांग्रेस, सपा, राजद, टीएमसी, वाम सहित इंडिया ब्लॉक के साथी तमाम विरोधी दलों द्वारा व्यवस्था, गंगा जी की स्वच्छता और सनातन के लगातार दुष्प्रचार के बाद भी इस बार भारत ने प्रयागराज महाकुंभ के माध्यम से न केवल महा रिकॉर्ड्स बना दिये, बल्कि अपनी आस्था, स्व अनुशासन, प्रकृति से जुड़ाव एवं आध्यात्मिक ज्ञान का लोहा दुनिया भर से मनवा लिया है। बिना किसी विशेष प्रयास के इनका विश्व पर्यंत जमकर प्रचार- प्रसार भी स्वत: ही हो गया है। सबसे बड़ी बात यह हुई की जात और पंथ में कथित रूप से विभाजित हिन्दू समाज ने सामाजिक समरसता का बड़ा संदेश भी दुनिया को दे दिया है।

2024 में कहां कहां गए कितने पर्यटक और श्रद्धालु :

ये आंकड़े आधिकारिक हैं जिनका उल्लेख उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा के पटल पर भी किया है।

मक्का – 1.4 करोड़
अजमेर शरीफ दरगाह – 73 लाख
वेटिकन सिटी – 80 लाख

अयोध्या जी - 16 करोड़
महाकुंभ प्रयागराज - 66 करोड़+

जो लोग कहते थे अयोध्या धाम में मंदिर बनाने से क्या मिलेगा, महाकुंभ जाने से क्या खाना मिलेगा, रोजगार मिलेगा, गरीबी दूर हो जाएगी ??? आज वो ढूंढते नहीं मिल रहे, मिल भी रहे हैं तो उनके सुर बदल ग‌ए हैं। अब स्वयं को सनातनी बताने की होड़ करते दिखाई देने लगे हैं।

देश के अर्थशास्त्रियों द्वारा दिया गया एक तथ्य यह भी है कि लगभग ₹ 12000 करोड़ के व्यय से प्रयागराज में सड़क, रेल, पुल, फ्लाईओवर, घाट, सौन्दर्यीकरण तथा अन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण व विकास, साथ ही महाकुंभ जिले का सृजन हुआ। इस महामेला ने ₹ 3 लाख करोड़ से भी अधिक का योगदान दिया। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है तथा प्रति व्यक्ति आय (GDP) में एक प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

कुछ अपरिहार्यता के साथ यह सुखद अनुभूति है। 144 साल बाद आयोजित हुआ विशेष, भव्य, दिव्य महाकुंभ अपार सफलता के साथ संपन्न हो गया है।

महाकुंभ- महा रिकॉर्ड

🌟 महारिकॉर्ड-1 : श्रद्धालु

अमेरिका व यूरोप की आबादी से दोगुने, रूस से 4 गुने, जापान से लगभग 6 गुने, कुल 66.3 करोड़ से भी अधिक लोग महाकुंभ पहुंचे।

🌟 महारिकॉर्ड-2 : इन्फ्रास्ट्रक्चर

4 हजार हेक्टेयर का महाकुंभ क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े स्टेडियम से 160 गुना बड़ा।

🌟 महारिकॉर्ड-3 : कुंभ सिटी

4 लाख से ज्यादा तंबू और 1.5 लाख टॉयलेट बने।

🌟 महारिकॉर्ड-4 : ट्रांसपोर्टेशन

13,830 ट्रेनों से पहुंचे 30.2 करोड़ श्रद्धालु इस दौरान 2,800 से ज्यादा फ्लाइट्स प्रयागराज पहुंचीं, जिसमें 4.5 लाख श्रद्धालुओं ने यात्रा की।

🌟 महारिकॉर्ड-5 : सिक्योरिटी

50 हजार सुरक्षाकर्मी और 2700 कैमरों से महाकुंभ की सुरक्षा।

🌟 महारिकॉर्ड-6 : हेल्थ

मेला क्षेत्र में 43 हॉस्पिटल बने 6 लाख लोगों का इलाज किया गया।

🌟 महारिकॉर्ड-7 : स्वच्छता

4 लाख डस्टबिन लगे, 11 हजार कर्मियों ने सफाई की, हर 25 मीटर पर एक डस्टबिन।

🌟 महारिकॉर्ड-8 : कारोबार

मेला क्षेत्र में 3 लाख करोड़ के लेन-देन का अनुमान।

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