₹ 810 की दर से खरीदे 40 हजार 500 स्टील के साधारण चम्मच, चौंकाने वाली दरों पर क्रय किये 1550 आंगनबाड़ियों के लिए थाली व जग
AI प्रणाली में भी कैसे लग जाती है सेंध, इसका खुलासा जरूरी
Newspost, MP Regional Desk. सिंगरौली, मध्य प्रदेश।
एक मुहावरा है ‘तू डाल डाल, मैं पात पात’। इसे प्राय: आप सभी ने सुना होगा और कभी न कभी इसका प्रयोग भी किया होगा। इसी मुहावरे को केन्द्र में रखकर केन्द्र की मोदी सरकार ने अनेक ऐसे उपाय केन्द्रीय योजनाओं के सही क्रियान्वयन के लिए प्रभावी भी किए। जैसे हितग्राही के बैंक खाते में सीधा ट्रांसफर करना (डीबीटी), राशन, गैस से लेकर तमाम व्यवस्थाओं का डिजिटलीकरण आदि। सरकारी खरीदी के लिये ‘जेम पोर्टल’ की व्यवस्था भी लागू कर दी। बावजूद इन सभी के जब दांतों तले अंगुली दबाने वाले सरकारी कृत्य सामने आते हैं तब एक बार फिर वही मुहावरा फिर याद आ जाता है।
क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि एक सामान्य स्टील का चम्मच ₹ 810 का भी हो सकता है? लेकिन मध्य प्रदेश का जिला सिंगरौली जिसे नेता अफसर प्रदेश की टकसाल के रूप में देखते हैं, माननीय हाईकोर्ट ने भी भ्रष्टतम जिला कहने के साथ ही इस जिले की कारगुज़ारियों को सीबीआई के लिये फिट क्यों बताया इसका एक उदाहरण यह भी हो सकता है। यहाँ के महिला व बाल विकास विभाग द्वारा एआई को भी धता बताते हुए जेम पोर्टल के माध्यम से चम्मच, थाली, जग आदि की खरीद जिस दर पर की गई वह अचंभित करने वाली है।
DMF से की गई खरीद -सूत्र
सूत्रों की मानें तो महिला व बाल विकास विभाग ने जिले के कुल 1550 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए बर्तनों की खरीदी डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF)से की है। यह फंड खनिज उत्पादन से प्राप्त होने वाले राजस्व का 25% होता है।
बर्तन खरीदी मामले में सिंगरौली की महिला बाल विकास विभाग के साथ साथ प्रदेश सरकार की हो रही किरकिरी के बाद अब ईओडब्लू रीवा की टीम हरकत में आई है। सिंगरौली में 1550 आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए चम्मच, जग व थाली खरीदी में कथित रूप से 4 करोड़ 98 लाख रुपये के भारी भरकम घोटाले की जाँच की जा रही है। शुक्रवार को दोपहर आर्थिक अपराध शाखा रीवा की 7 सदस्यी टीम ने महिला एवं बाल विकास विभाग में दबिश दी। इस दौरान डीपीओ राजेश राम गुप्ता तो नदारद रहे। ईओडब्लू टीम ने प्रभारी डीपीओ से सामान खरीदी के दस्तावेज लेकर गहन जाँच पड़ताल शुरू कर दी है। कयास लगाया जा रहा है कि यह टीम बर्तन घोटाले के आलावा कई अन्य सामानों की खरीदी का भी पड़ताल कर बड़ा पर्दाफास कर सकती है।
जानकारी के अनुसार ईओडब्लू निरीक्षक मोहित सक्सेना के नेतृत्व में उप निरीक्षक अभिषेक पाण्डेय, संतोष पाण्डेय, प्रधान आरक्षक कुल भूषण द्विवेदी, पुष्पेंद्र पटेल, घनश्याम त्रिपाठी व आरक्षक संतोष मिश्रा की सात सदस्यीय टीम शुक्रवार की दोपहर में अचानक महिला बाल विकास विभाग सिंगरौली में पहुंची और दबिश दे दी। बताया जा रहा है कि यहाँ 1550 आंगन बाड़ी केन्द्रों के लिए चम्मच, जग व थाली आदि बर्तन खरीदी के नाम पर 4 करोड़ 98 लाख का भारी भरकम घोटाला किया गया है। फिलहाल ईओडब्ल्यू टीम ने मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।
इनका कहना है
निरीक्षक श्री सक्सेना के अनुसार महिला बाल विकास विभाग अधिकारी राजेश राम गुप्ता कार्यालय में नहीं हैं। बताया गया कि वह किसी आवश्यक विभागीय कार्य से भोपाल गये हैं। प्रभारी डीपीओ आरपी सिंह से उक्त सामानों के खरीदी से जुड़े आवश्यक सभी दस्तावेजों को मांगकर टीम द्वारा जाँच की जा रही है। पूरी जाँच होने के बाद ही बर्तन घोटाले के आरोप की सत्यता का पता चलेगा। श्री सक्सेना के अनुसार बर्तन के साथ अन्य सामान खरीदी के दस्तावेजों की भी जाँच करेंगे।
ईओडब्ल्यु की जांच रपट कब और कैसी आएगी यह समय बताएगा।
खरीदी में घोटालों का यह है आरोप
आरोप है कि महिला बाल विकास विभाग ने जिले की 1550 आंगनबाड़ियों के लिए 4 करोड़ 98 लाख 88 हजार 300 रुपए में बर्तन खरीदे थे। जैम पोर्टल के जरिए इस खरीदी में 3100 जग, 629 सर्विस स्पून और 40 हजार 500 चम्मच शामिल हैं। जिनमें एक साधारण चम्मच की कीमत 810 रुपए, एक सर्विस स्पून की कीमत 1,348 रुपए और एक जग की कीमत 1,247 रुपए आंकी गई, जो बाजार मूल्य से कई गुना अधिक है।
क्या अन्य विभागों में भी हो सकता है खरीदी घोटाला ?
बर्तन खरीदी में कथित घोटाले की जाँच करने पहुंची ईओडब्ल्यू टीम से आदिवासी विकास विभाग में भी लगभग 3 करोड़ के फर्नीचर खरीदी की जाँच की मांग उठी है। सूत्रों की मानें तो चर्चित महिला बाल विकास अधिकारी राजेश राम गुप्ता के पास आदिवासी विकास विभाग का भी प्रभार है। इनके कार्यकाल में विभाग में 3 करोड़ रुपये का फर्नीचर खरीदा गया है। ईओडब्ल्यू टीम से उसकी भी जाँच करने की मांग उठने लगी है।
प्रश्न यह भी उठने लगे हैं कि ऐसे घोटाले की जाँच का परिणाम क्या निकलेगा? क्या ईओडब्ल्यू द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर अन्य विभागों की खरीदी की भी जाँच की जाएगी? आदि...आदि !!
