संबंधों को संभालना भी जरूरी है !!

Newspost, Spiritual Desk. Presenter – Swami Dayanand Sharma.

Message by – Saint Surpati Das, ISKCON

      🪷 || व्यक्तित्व निर्माण || 🪷

        स्वभाव में ही किसी व्यक्ति का प्रभाव झलकता है। व्यक्तित्व की भी अपनी भाषा होती है जो कलम या जिह्वा के इस्तेमाल के बिना भी लोगों के अंतर्मन को छू जाती है। जिस प्रकार कस्तूरी की पहचान उसकी सुगंधी से होती है, उसी प्रकार व्यक्तित्व की भी अपनी एक सुगंधी होती है, जिसे बताया अथवा दिखाया तो नहीं जा सकता केवल महसूस किया जा सकता है।

         सिंहासन पर बैठकर व्यक्तित्व महान नहीं बनता अपितु महान व्यक्तित्व एक दिन जन-जन के हृदय सिंहासन पर अवश्य बैठ जाता है। सिंहासन पर बैठना जीवन की उपलब्धि हो अथवा नहीं मगर किसी के हृदय में बैठना जीवन की वास्तविक उपलब्धि अवश्य है।

       राज सिंहासन पर बैठ सको न बैठ सको मगर किसी के हृदय सिंहासन पर बैठ सको तो समझना चाहिए कि आपका जीवन सार्थक हो गया है और यही तो विराट व्यक्तित्व का एक प्रधान गुण भी है।
   मधुर संबंधों के पुष्प ही हमारी जीवन बगिया को सुंदर एवं सुगंधित बनाते हैं। जीवन में संबंध आसानी से बन तो जाते हैं लेकिन आसानी से सम्भल नहीं पाते इसलिए प्रेम के शीतल जल व विश्वास की खाद के नित्य प्रयोग से इनकी जड़ों को मजबूत बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए।

   अविश्वास की आँच एवं क्रोध की बाढ़ में संबंध का पौधा कभी नहीं पनप सकता है। संबंधों की कदर भी पैसों के जैसे ही करनी चाहिए क्योंकि दोनों को कमाना मुश्किल है पर गँवाना बहुत आसान।

    छोटी-छोटी बातें ही हमारे संबंधो में कड़वाहट घोल देती हैं इसलिए संबधों की मधुरता बनाये रखने के लिए छोटी-छोटी बातों को अनदेखा कर देना भी जीवन की एक बहुत बड़ी कला है। यदि हमारे लिए स्व प्रतिष्ठा से अधिक मूल्य हमारे संबंधों का है तो जीवन में बहुत सारी बातों को अनसुना करके आगे बढ़ जाना ही इनको टिकाऊ रखने का एकमात्र उपाय है।

सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल

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