एनसीएल के रुख को लेकर हुई तूतू मैं मैं, कार्यक्रम स्थगित

Newspost, News Desk.

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। शुक्रवार को सायं एनसीएल द्वारा अपने दुधिचुआ और जयंत कोयला खदानों के विस्तार के लिये मोरवा शहर के सघन आबाद आवासीय व व्यावसायिक वार्डों के विस्थापन के संबंध में सिंगरौली विस्थापन मंच द्वारा अग्रवाल धर्मशाला में बुलाई गई बैठक में हंगामा हो गया। यहाँ एनसीएल के रुख को लेकर सिंगरौली विस्थापन मंच द्वारा जनमानस में व्याप्त आशंकाओं विशेषकर विस्थापन की शर्तों व पुनर्स्थापन स्थल के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं देने, एनसीएल प्रबंधन की ही बातों को आम लोगों के बीच प्रसारित करने तथा कंपनी का पक्षधर होने के आरोपों के साथ बैठक में शामिल दीगर संगठन के पदाधिकारियों ने एसवीएम को आड़े हाथों लिया। बात सामान्य संवाद से बिगड़कर उग्र हो गई और तू तू मैं मैं की स्थिति निर्मित होने के बाद बैठक समाप्त हो गई। इस बैठक में सिंगरौली विस्थापन मंच (SVM) के अध्यक्ष दधिलाल सिंह, वीरेन्द्र गोयल, ललित श्रीवास्तव, मनोज कुलश्रेष्ठ, के.के. जायसवाल, डीके सिन्हा, प्रदीप गुप्ता आदि तथा सिंगरौली पुनर्स्थापन मंच (SPM) के सतीश उप्पल, राजेश सिंह, पार्षद शेखर सिंह, भाजपा के विनोद कुरुवंशी, सीए आशीष टंडन, चंदन सिंह, अभ्युदय सिंह व अन्य के साथ ही सैकड़ों स्थानीय लोग मौजूद रहे। 

विस्थापन की शर्तों और पुनर्स्थापन स्थल की चर्चा पर ‌उपजा विवाद

बैठक के दौरान सिंगरौली विस्थापन मंच के पदाधिकारियों के संबोधन के बाद लोगों का सुझाव लिया जा रहा था। इसी बीच बैठक में शामिल सिंगरौली पुनर्स्थापन मंच के लोगों ने मेढ़ौली वार्ड क्रमांक 10 (ननि का यह वार्ड ग्रामीण है) के करीब 300 घरों के मुआवजा के अधर में लटकने का सवाल उठा दिया तथा एनसीएल के असंवेदनशील रवैये का जिक्र किया। इस पर एसवीएम के पदाधिकारियों ने जोर देकर कहा कि एनसीएल सब कुछ लिखित में नहीं दे सकती, लेकिन उन्हें बहुत कुछ लिखित में दिया है। आप सभी नापी होने दें, कोई विसंगति हुई तो वे उसका समाधान निकाल देंगे। इस पर एसपीएम की ओर से उन सभी तथ्यों को आम लोगों के सामने रखने की बात की गई तथा एसवीएम को एनसीएल का पिछलग्गू कहा गया। एसपीएम के पदाधिकारी राजेश सिंह का कहना था कि एनसीएल जब विशेष लोगों को बहुत कुछ लिखित में दे सकती है तब कंपनी प्रबंधन को जनता से संवाद करना चाहिए। द्विपक्षीय बातचीत और आम सहमति से आए सभी तथ्यों को पूरी पार्दर्शिता के साथ सार्वजनिक करना चाहिए। एनसीएल द्वारा अपने कुछ खास लोगों को ही सभी जानकारी देना कत्त‌ई उचित नहीं है। इस बात पर जमकर बवाल हुआ और तू तू मैं मैं शुरू हो गयी। कार्यक्रम में विवाद एवं तनाव की स्थित को देखकर बैठक में आए लोग धीरे धीरे निकलने लगे और बैठक समाप्त हो गयी। 

एसवी‌एम ने नापी में सहयोग ‌एवं दस्तावेजों को तैयार रखने को कहा था

बैठक के शुरुआत में एसवीएम के पदाधिकारियों द्वारा एनसीएल की अनुबंधित टीआईएसएस कंपनी द्वारा नापी को करने देने की बात की गई थी। तर्क दिया गया था कि इससे पता चलेगा कि कुल कितना क्षेत्र और कितने लोग विस्थापित और प्रभावित हो रहे हैं। यदि इसमें कोई अनियमिता बरती जाती है तो एसवीएम आपके साथ खड़ी है। लोगों को एनसीएल द्वारा अपेक्षित दस्तावेजों को जल्द से जल्द तैयार कराने को कहा गया था। लोगों को आधार कार्ड, समग्र आईडी आदि तैयार कराने की बात की गई थी। एसवीएम के एक वक्ता ने कहा कि एनसीएल प्रबंधन बहुत कुछ लिखित में नहीं देना चाहता, लेकिन हम लोगों ने बहुत कुछ लिखित में लिया है। अभी तक हर वार्डों के अलग अलग रेट कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार बनी थी। लेकिन एनसीएल प्रबंधन ने यह बात मान लिया है कि एक से 11 वार्ड में जो अधिकतम रेट होगा वही सभी वार्डों में दिया जायेगा। ललित श्रीवास्तव ने भी सभा को संबोधित करते हुए विस्थापन मुद्दे पर एनसीएल के पक्ष को विधिवत जनता के सामने रखा था। 
ज्ञात हो कि एनसीएल द्वारा जयंत एवं दुधीचुआ खदान विस्तार के लिए मोरवा नगरीय क्षेत्र में करीब 1485.66 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहण के लिए टीआईएसएस मुंबई की संयुक्त टीम द्वारा जिला प्रशासन व एनसीएल के सहयोग से भूमि और संपति का भौतिक सर्वेक्षण किया जाना है। विस्थापन एवं नापी से संबंधित आमजन की आशंकाओं से जुड़े सवाल पूछे जाने पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। एसपीएम द्वारा एसवीएम पर एनसीएल प्रबंधन के साथ सांठ गांठ और एजेंट होने का आरोप लगाने के बाद मामला बिगड़ा। वहां विवाद की स्थिति देख अग्रवाल धर्मशाला में एकत्रित लोग एक एक कर खिसकने लगे और बैठक का समापन हो गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *