Newspost, Editorial/Literature Desk. @RohitGupta
डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ हिंदी साहित्य के नभ पर स्थापित अपने नवरंगी आभा को बिखेरने वाले अप्रतिम नक्षत्र हैं। आपकी ख्याति हिंदी भाषा के नामचीन गजलकार के रूप में सूर्य की रश्मियों की भांति विस्तारित है। ‘नवरंग’ जी के रचना काल का लंबा समय मध्य प्रदेश के सिंगरौली क्षेत्र में बीता है। आप एनटीपीसी की परियोजनाओं में अपना तकनीकी पुरुषार्थ सिद्ध करते हुए हिंदी की संपन्नता के लिए सतत प्रयत्नशील रहे। आप राज्यों से लेकर राष्ट्रीय स्तर के अनेक सम्मानों से अलंकृत हैं। देश के विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में आपके समसामयिक लेखों को ससम्मान प्रकाशित किया गया है।

हाल ही दिल्ली की प्रतिष्ठित संस्था ‘हिंदुस्तानी भाषा अकादमी’ द्वारा देश के 50 कवियों का चयन किया गया जिनमें से डॉ. माणिक विश्वकर्मा ”नवरंग’ एक हैं। संप्रति ‘नवरंग’ जी भाटागांव, रायपुर, छत्तीसगढ़ में आबाद हैं।
हम आपके लिये नवरंग जी की 10 चयनित हिंदी गजलों को लेकर आए हैं। प्रथम कड़ी में हम उनकी दो गजलों को प्रकाशित कर रहे हैं।
प्रस्तुत हैं डॉ माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ की गजलें..??
::1::
जिसमें ढालोगे मैं उसमें ढल जाऊंगा
नेह दोगे मुझे मैं पिघल जाऊंगा
गर हुआ आचमन गंगाजल में मेरा
ढल गई उम्र तो क्या मैं फल जाऊंगा
मैं ना रोड़ा बनूंगा किसी के लिए
वक़त का एक लम्हा हूँ टल जाऊंगा
ये ज़रूरी नहीं आके थामे कोई
मुझको आवाज़ दोगे सँभल जाऊंगा
रंज़ से कब किसी का गुज़ारा हुआ
मुझको दुलराओगे मैं बहल जाऊंगा
दिल में रहने की मेरी तमन्ना नहीं
चन्द लोगों की आँखों में पल जाऊंगा
:: 2 ::
बेवजह मैं आज तक बोला नहीं हूँ
सत्य के पथ पर कभी डोला नहीं हूँ
जानता हूँ खेल में बाजी पलटना
मित्रवर पत्ता अभी खोला नहीं हूँ
बाँसुरी कहने की तुम गलती ना करना
ठोस हूँ भीतर से मैं पोला नहीं हूँ
वक़्त मुझको एक दिन धारण करेगा
रोज़ बदला जाए वो चोला नहीं हूँ
हर तरह की चाल से हूँ ख़ूब वाकिफ़
मौन रहता हूँ मगर भोला नहीं हूँ
लोग पाते हैं मेरे कारण उजाला
प्रेम में कटुता कभी घोला नहीं हूँ.
<Newspost Global>
(चेतावनी: उपरोक्त प्रकाशित सामग्री कॉपीराइट एक्ट के तहत कॉपी करने हेतु प्रतिबंधित है। सर्वाधिकार- डॉ. माणिक विश्वकर्मा ‘नवरंग’ के पास सुरक्षित। Newspost Global ‘नवरंग’ की स्वीकृति से यह प्रकाशन कर रहा है)।
