केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री से नई दिल्ली में मिले पूर्व विधायक रामलल्लू बैस
एनसीएल द्वारा अधिग्रहण की जाने वाली भूमि के मुआवजा दर निर्धारण एवं पुनर्वास को लेकर सौंपा मांग पत्र
Newspost, MP Regional Desk. @rohitgupta
सिंगरौली/ नई दिल्ली। भाजपा के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक रामलल्लू बैस ने गत बुधवार को अपने नई दिल्ली प्रवास के दौरान केन्द्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी किशन रेड्डी से उनके कार्यालय में भेंटकर छ: सूत्री मांग पत्र सौंपा। इस दौरान उनके साथ रेलवे बोर्ड की परामर्शदात्री समिति के सदस्य श्रीकृष्ण गौतम भी उपस्थित रहे।
उक्त पत्र में बताया गया है कि नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड सिंगरौली द्वारा कोयला उत्खन्न हेतु नगर निगम के शहरी व्यावसायिक व आवासीय बसाहट एवं ग्रामीण भूमि, भवन, कूप, वृक्ष, बांध, हैण्डपम्प, आदि का अर्जन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में 60,000 से अधिक आबादी विस्थापित होगी।
मांग पत्र में विभिन्न बिंदुओं में यह उल्लेख किया गया है कि भूमि, भवन व परिसंपत्तियों के मुआवजा दर निर्धारण में विद्यमान कमियों को दूर करने के साथ ही विस्थापित होने वाले लोगों को हाइवे के उत्तरी भाग में ही पुनर्वास देना उचित होगा।
सौंपे गए मांग पत्र में क्या है ?
(1) ग्रामीण भूमि का वास्तविक बाजार मूल्य 25 लाख रुपये प्रति एकड़ से कहीं भी कम नहीं है। साथ ही नगरीय क्षेत्र (शहरी) होने के नाते आवासीय भूमि (डायर्वसन) क्षेत्र वर्ग मीटर पर मुआवजा दिया जाए।
(2) किसानों, व्यापारियों, व्यवसायिक लोगों को उचित गाईडलाइन तय कर मुआवजा निर्धारित किया जाए।
(3) बार-बार अर्थात 2-3 बार विस्थापित लोगों को अधिक राशि उपलब्ध करायी जाए। उन्होंने बार-बार विस्थापन का दंश झेला है।
(4) ग्राम मेढ़ौली, पजरेह, चटका, झिगुरदह आदि गावों को अर्जन सीबीए एक्ट 1957 की धारा 9 (1) के साथ धारा 11 का भी नोटिफिकेशन भारत सरकार कोयला मंत्रालय द्वारा जारी किया गया है।
(5) भूमि विस्थापित गणों को 0.50 एकड़ या डिसेडिंग (घटते क्रम) में नौकरी दिया जाए।
(6) जो लोग विस्थापित हो रहे हैं उनको ग्राम कुशवई, पिड़रताली, कठास, झिंगुरदह भाग में शासकीय भूमि पर पुनर्स्थापित पुर्नवास क्षेत्र बनाया जाकर, बसाया जाए।
पत्र में अनुरोध किया गया है कि उपरोक्त मांगों पर विचार करते हुए न्याय प्रदान किया जाए।
