Newspost, National/Corporate Desk. सिंगरौली।

संगठित - असंगठित मजदूरों और केन्द्र सरकार की नीतियों के साथ साथ 4 नये लेबर कोड के विरोध में आगामी 12 फरवरी 2026 को प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल को सफल बनाने के लिए वैसे तो सभी क्षेत्रों में सक्रिय मजदूर संगठन अब मैदान में उतर ग‌ए हैं, लेकिन कोल इंडिया स्तर पर कार्यरत प्रमुख ट्रेड यूनियनों - एटक, इंटक, सीटू व एच‌एम‌एस के संयुक्त मोर्चा द्वारा अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया गया है। हड़ताल को सफल बनाने के लिए गेट मीटिंग कर श्रमिकों को हड़ताल के लिए तैयार किया जा रहा है। संयुक्त मोर्चा के बैनर एवं अपने संगठन के झंडे के साथ एटक से अजय कुमार, सीटू से पीएस पांडे, इंटक से निरजंन झा, एच‌एम‌एस से वीएन सिंह, ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन से जय बहादुर यादव ने एनसीएल की अमलोरी , निगाही एवं सीडब्ल्यूएस परियोजनाओं में महाप्रबंधक कार्यालय, सीएचपी, कैंटीन आदि के सामने गेट मीटिंग कर कर्मचारियों को संबोधित भी किया।

हड़ताल सबकी जिम्मेदारी - ट्रेड यूनियनों का संयुक्त मोर्चा

हड़ताल पर आमादा ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारियों ने गंभीर चिंता जताते हुए सभी ट्रेड यूनियनों एवं श्रमिकों से अपील की है कि वे आगामी 12 फरवरी को आहूत देशव्यापी हड़ताल में एकजुटता का परिचय दें। इन संगठनों के वरिष्ठ पदाधिकारियों जिनमें एटक से अजय कुमार सीटू से पीएस पांडे, इंटक से निरजंन झा, एच‌एम‌एस से वीएनसिंह, ओबीसी वेलफेयर एसोसिएशन से जय बहादुर यादव शामिल रहे, इन्होंने एनसीएल की विभिन्न परियोजनाओं में श्रमिकों से कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा लाया गया लेबर कोड मजदूरों को गुलाम बनाने का फरमान है। मजदूर विरोधी लेबर कोड के खिलाफ 12 फरवरी 2026 को होने वाली हड़ताल को सफल बनाने की हम सभी की जिम्मेदारी है।

श्रमिक नेताओं का कहना-

मजदूर नेताओं द्वारा श्रमिकों को संबोधित करते हुए कहा गया कि चारों नये लेबर कोड लागू कर मजदूरों के अधिकार छीनकर उन्हें पूरी तरह से मालिकों या प्रबंधन का गुलाम बनाने की साजिश है। कोयला मजदूरों पर इसका क्या असर होगा इसे समझने की जरूरत है। यह लेबर कोड मालिकों के दबाव में लाया गया है। ये मालिक का पक्षधर और मजदूर विरोधी हैं। उनको कहना था कि इसके द्वारा केंद्र सरकार ने मजदूरों द्वारा क‌ई सालों के संघर्षों से हासिल अधिकारों पर जबरदस्त हमला किया है।

कोयला मजदूरों की चिंता 

मजदूर नेताओं का कहना था कि आद्यौगिक संबंधों पर इसका बुरा प्रभाव तो पड़ेगा ही, इससे अद्यौगिक अशांति पैदा होगी। जेबीसीसीआई के गठन और 12वें वेतन समझौता पर भी इससे प्रश्न चिह्न लग जाएगा। स्थायी नौकरी के बदले केवल फिक्स टर्म एम्प्लायमेंट दिया जाएगा। मालिक जब चाहेगा मजदूरों को नौकरी से बाहर निकाल देगा। शिफ्ट का समय 8 घंटा से बढ़ाकर 12 घंटा किया जा सकता है।

निजीकरण को मिलेगा बढ़ावा 

इससे कोल इंडिया का निजीकरण और तेजी से होगा। वर्तमान वेतन और अन्य सुविधाओं में कटौती शुरू हो जायेगी। मृत्यु की स्थिति में आश्रितों को नौकरी देने (9.3.0), 9.4.0 और 9.5.0 का प्रावधान भी छीना जा सकता है। ठेका कर्मियों को एचपीसी वेजेज मिलना बंद किया जा सकता है। जमीन के बदले नौकरी, पुनर्वास का प्रावधान को समाप्त किया जा सकता है। वेतन समझौता कराने, वर्तमान सुविधाओं को बचाने, जमीन के बदले नौकरी के अधिकार को बचाने या कोयला उद्योग का निजीकरण को रोकने के लिए मजदूरों को आंदोलन और हड़ताल करने का जो अधिकार है उसे छीन लिया जाएगा। यह सब ट्रेड यूनियनों के नेताओं ने अपने भाषण में कहा।

कठिन हो जाएगा संगठन बनाना 

इस कोड के लागू होने से नये ट्रेड यूनियन का गठन करना कठिन हो जाएगा। साथ ही किसी भी बहाने वर्तमान ट्रेड यूनियनों का रजिस्ट्रेशन कभी भी समाप्त किया जा सकता है। इस कोड के द्वारा मजदूरों के बड़े हिस्से को ट्रेड यूनियन के दायरे से बाहर का दिया गया है। 

द्विपक्षीय समितियों के लिए भी खतरा 

कोल इंडिया से लेकर सभी अनुषंगी कंपनियों ईसीएल, बीसीसीएल, सीसीएल, सीएमपीडीआई, डब्ल्यूसीएल, एसईसीएल, एनसीएल, एमसीएल, एनईसी और सिंगरेनी कोलफील्ड्स में सभी द्विपक्षीय फोरम यानी जीसीसी, कल्याण बोर्ड, सेफ्टी कमिटी आदि सभी कमेटियाँ खत्म की जा सकती हैं। ये चार लेबर कोड लागू कर केंद्र सरकार देश के कोयला उद्योग को 1972 (राष्ट्रीयकरण के पहले) की स्थिति में ले जाने पर आमादा है। कोयला उद्योग को ठेकेदारों और उनके लठैतों के हवाले करने की साजिश रच दी गई है और हम कोयला मजदूर को इसके खिलाफ लड़ने के अधिकार को छीनने के लिए ही यह लेबर कोड लाया गया है।

संयुक्त मोर्चा के बैनर तले 12 फरवरी 2026 की हड़ताल को पूरी तरह से सफल बनाने की पुरजोर अपील की है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *