🪷🙏🏻जय माँ शारदे 🙏🪷

Newspost, Spiritual Desk. Presenter – Swami Dayanand Sharma.

🕉️🪷 शुभ शनिवार 🪷🕉️

     जीवन केवल परिणामों से नहीं, बल्कि उस सजग चेतना से मापा जाता है जो हर क्षण जागृत रहती है। न कोई पराजय स्थायी है, न कोई विजय अंतिम। जब भीतर दृष्टि बदलती है, तब संसार भी स्वयं नवीन प्रतीत होता है; वस्तुएँ वही रहती हैं, पर अनुभव का रूप बदल जाता है।

     मन शांति और स्थिरता में खिलता है जब वह हर परिस्थिति को सहजता से स्वीकार करता है। अति हर रूप में बंधन लाती है, यहाँ तक कि बहुत अच्छा बनने की भी। अपनी सीमाओं को पहचानना और उनका सम्मान करना ही जीवन को संतुलित बनाता है, और यही आत्मा की यात्रा का आधार है।

    सत्य और धर्म का मार्ग निर्मल और पवित्र होता है। असत्य या अनुचित साधन उसे कमजोर कर देते हैं। ज्ञान केवल जानने में नहीं, बल्कि अनुभव और विवेक के साथ जीने में है। यही आत्मा का प्रकाश है, और यही जीवन का वास्तविक स्वरूप है। जहाँ दृष्टि निर्मल होती है, वहीँ जीवन स्वयं अपने आप प्रकाशित हो उठता है।

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आज का यह भी सन्देश

      हमारी अहमता (मैं सही हूँ, मैं श्रेष्ठ हूँ, मेरी बात ही अंतिम है।)  ही जीवन में प्रतिद्वंदिता और प्रतिशोध का कारण बन जाती है। अभिमान न क्षमा माँगने देता है और न क्षमा करने देता है। यह व्यक्ति को पल-पल प्रतिशोध की अग्नि में जलाता रहता है। माफ कर दो या या माफी मांग लो, जीवन की बहुत सारी समस्याएं स्वतः ही हल हो जायेंगी।

     किसी को उसकी गलती के लिए क्षमा कर देना भी एक साहसिक एवं दैवीय गुण है। परिवार में, मैत्री में या समाज में संबंधों को मधुर बनाने हेतु किसी भी व्यक्ति के अंदर इन दोनों गुणों में से एक गुण की प्रमुखता अवश्य होनी चाहिए।

    महाभारत की नींव ही इस सूत्र के आधार पर पड़ी कि किसी के द्वारा क्षमा नहीं किया गया तो किसी के द्वारा क्षमा नहीं मांगी गई। हमारा जीवन एक नयें महाभारत से बचकर आनंद में व्यतीत हो इसके लिए क्षमा कर दें या क्षमा माँग लें इस सूत्र को जीवन में स्थान अवश्य दीजिए।

🚩सुरपति दास
विहिप/इस्कॉन/भक्तिवेदान्त हॉस्पिटल/भक्तिवेदान्त विश्वविद्यालय

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