कलेक्टर ने जारी किये निर्देश, ताबड़तोड़ चल रहे निर्माणकार्यों को अवैध घोषित कर होगी कार्रवाई

Newspostg, Regional Desk, A. Anand.

सिंगरौली, एमपी। प्रयागराज से सिंगरौली को जोड़ने वाले प्रस्तावित लगभग 190 किमी लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग 135 (सी) के निर्माण के लिये, राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3 (ए) में अधिग्रहण के लिए प्रकाशित चितरंगी विकास खंड की भूमियों के क्रय-विक्रय, नामांतरण, बंटनवारा एवं अंतरण पर कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया है। प्रयागराज से वाया चितरंगी -सिंगरौली प्रस्तावित यह सड़क लगभग 32 गांवों से होकर गुजरेगी। चितरंगी ब्लॉक में इस मार्ग की लंबाई लगभग 90 किलोमीटर है और इन्हीं गांवों के भूमियों को अधिग्रहीत किया जाएगा। क्या यह प्रोजेक्ट समय से शुरू हो जाएगा ? यह एक यक्ष प्रश्न है जिसका उत्तर समय ही देगा !

विस्थापन माफिया सक्रिय; अधिग्रहण कार्य हो सकता है प्रभावित

एन‌एच 135 सी के निर्माण हेतु प्रस्तावित मार्ग की जमीनों पर मुआवजा माफिया सक्रिय हो ग‌ए हैं। अधिग्रहित की जाने वाली भूमि पर दिन रात धड़ाधड़ मकान बनाने का काम तेजी के साथ चल रहा है। प्रशासनिक दखल के बावजूद रातों रात हजारों की संख्या में प्रस्तावित मार्ग की भूमि के आराजियों में मकानों के बनने का सिलसिला युद्धस्तर पर चल पड़ा है। दूसरी ओर उप खण्ड अधिकारी एवं भू-अर्जन अधिकारी चितरंगी के पत्रानुसार कलेक्टर ने गत 21 मई को राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम 1956 की धारा 3 (ए) का जिक्र करते हुए अधिग्रहण के लिए 11 मार्च 2024 को राष्ट्रीय राजपत्र में प्रकाशित भूमियों के खसरा नम्बर के क्रय-विक्रय, नामांतरण, बंटनवारा एवं अंतरण पर कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला ने तत्काल प्रभाव से रोक लगा देने का आदेश जारी किया है। उक्त आदेश संबंधित पत्र उप खण्ड अधिकारी चितरंगी, जिला पंजीयक सिंगरौली एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी चितरंगी को भेजा गया है। बावजूद इसके कथित अवैध निर्माण का क्रम अभी भी जारी बताया जा रहा है।

उल्लेखनीय है यह बात…

यहाँ उल्लेखनीय बात यह है कि अधिग्रहण संबंधी अधिसूचना के जारी होते ही मोटी मुआवजा राशि के लालच में ऐसे कृत्य जिले भर में जहाँ तहाँ चलते रहे हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था तो प्रभावित होती ही है, इस प्रकार के कृत्य से निर्माण कार्य की लागत भी अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाती है और कानून व्यवस्था की स्थिति भी निर्मित हो जाती है। देखा जाय तो 1960 के दशक से प्रस्तावित सिंगरौली-ललितपुर रेल खण्ड और लगभग 13 वर्ष बाद भी एन‌एच 39 रीवा- रांची का सीधी से सिंगरौली बार्डर तक का निर्माण कार्य आज तक नहीं हो सका है। इसके लिए ऐसे कृत्यों को भी एक प्रमुख कारण माना जा सकता है। इस प्रकार के कृत्यों में कदाचित राजनीतिक एवं विभागीय लोगों की संलिप्तता होने की चर्चा अक्सर की जाती है।

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