नदी नालों में वर्षों बाद आया उफ़ान, सड़क- पुलिया हुए क्षतिग्रस्त, टूटे पेड़, आवागमन भी हुआ बाधित
📌एनसीएल के खदानों में भरा पानी, कई मशीनें डूबीं, उत्पादन व प्रेषण लगभग ठप्प
Newspost, MP/UP Regional Desk. A. Anand.
गत 3 दिनों यानी रविवार से मंगलवार तक लगातार हुई भारी बारिश ने इस बार सिंगरौली- ऊर्जांचल में पिछले दशक तक हुई मानसूनी वर्षा के सभी रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है। इस वर्षा के कारण गांव, कस्बों से लेकर शहरी क्षेत्र में जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। कोल इंडिया की मिनी रत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) सिंगरौली की सभी खुली कोयला खदानों में पानी भर जाने से कई मशीनों के जलमग्न होने की जानकारी के साथ ही सूत्रों का कहना है कि परियोजनाओं में उत्पादन एवं प्रेषण का कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो गया है। दूसरी ओर सिंगरौली- चितरंगी मार्ग पर स्थित कई पुल पुलिया के ऊपर से पानी का तेज बहाव देखा गया। कई जगह पेड़ गिर गए व सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की भी जानकारी मिली है। एक मृत प्राय स्थिति में पहुँच चुकी बिजुल नदी में दशकों बाद बाढ़ आ गई। पहाड़ी क्षेत्र के सभी नदी नालों को उफान पर देखा गया जिससे मंगलवार को आवागमन लगभग बाधित ही रहा। मोरवा थाना क्षेत्र के रेलवे छठ घाट पुल के ऊपर से पानी बह रहा था।
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कुछ ऐसा ही हाल ग्राम खिरवा के समीप स्थित पुल का भी रहा। इस पुलके ऊपर तक पानी चढ़ गया। पुल के ऊपर पानी के तेज बहाव के कारण पुलिस प्रशासन ने वाहनों को दोनों ओर रोक दिया था। गोरबी चौकी क्षेत्र से ग्राम करैला होते हुए चितरंगी जाने वाले मार्ग पर भी बारिश ने तांडव किया। इस मार्ग के एक हिस्से में कटाव आ गया जिससे आवागमन बाधित हो गया। आज अनंत चतुर्दशी एवं भगवान विश्वकर्मा की जयंती भी थी। लगातार हुई भारी बारिश ने श्रीगणेश चतुर्दशी एवं देव शिल्पी भगवान विश्वकर्मा के जयंती उत्सव को भी धो डाला। पांडालों तक श्रद्धालु जन पहुंच ही नहीं सके।
मोरवा थाना की गोरबी चौकी क्षेत्र में प्रभावित इलाकों में प्रभारी भिपेंद्र पाठक पुलिस बल के साथ लोगों को समझाइश देने में जुटे रहे। इस बारिश और तेज पछुआ पवन के कारण गोरबी परिक्षेत्र के ग्रामीण अंचल से सिंगरौली शहर तक सड़क पर जगह जगह पेड़ धराशाई होकर गिरे मिले। स्थानीय प्रशासन द्वारा उन्हें हटाकर आवागमन सुगम करने का प्रयास दिन भर चलता रहा। इस भारी बरसात में कई जगह शॉर्ट सर्किट होने के कारण विद्युत आपूर्ति भी घंटों बाधित रही। एनसीएल कॉलोनी सहित संपूर्ण सिंगरौली शहर में दिनभर बिजली आती जाती रही।
अलर्ट मोड में रहा जिला प्रशासन
भारी बारिश की संभावनाओं के दृष्टिगत सिंगरौली पुलिस अधीक्षक श्रीमती निवेदिता गुप्ता ने सभी थाना एवं चौकी प्रभारियों को अलर्ट मोड पर रखा था। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन द्वारा गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन एवं विश्वकर्मा पूजन एवं आगामी दिवस मूर्ति के विसर्जन के संबंध में भी आयोजक मंडलों के लोगों को चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर पुलिस प्रशासन द्वारा अनाउंसमेंट एवं पब्लिक ऐडवाइजरी भी जारी कर लोगों को उफनती नदियों एवं पुलों के ऊपर बह रहे पानी को लेकर सतर्कता बरतने के लिए सजग किया गया है।

बारिश ने तोड़े सारे रिकॉर्ड
इस साल सिंगरौली जिले में इंद्र देव ने विशेष कृपा बरसाई है। बीते वर्ष 17 सितंबर तक एमपी के औद्योगिक सिंगरौली तहसील में 496.3 मिली मीटर बरसात हुई थी जो इस वर्ष अब तक 1020.4 एमएम रही। इसके अतिरिक्त देवसर तहसील में बीते वर्ष 17 सितंबर तक 616.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी जो अब तक देवसर में 1309.1 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई। इसी प्रकार चितरंगी में बीते वर्ष 698.8 एमएम की अपेक्षा इस वर्ष 1095.3 एमएम बारिश दर्ज की गई। सरई तहसील में 554.9 एमएम की जगह इस वर्ष 1078.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई। वहीं माड़ा में 805.1 एमएम की जगह इस वर्ष 1203.8 एमएम वर्षा दर्ज की गई। जिले में औसतन इस वर्ष करीब दुगनी से अधिक वर्षा हुई है। बीते वर्ष जहां 17 सितंबर तक 634.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई थी, वहीं इस वर्ष 1143.3 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।
ओबरा डैम के पांच फाटक खोले गए
मध्यप्रदेश के धुर पूर्व में स्थित सिंगरौली व आसपास के क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश के कारण उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में स्थित ओबरा बांध का अधिकतम जलस्तर 193.24 मीटर तक पहुंच जाने से मंगलवार की सुबह ओबरा बांध के पांच गेट खोल दिए गए। इस दौरान ओबरा बांध के गेट नंबर 7, 8 एवं 9 को 10 फीट और गेट नंबर 6 व 10 को 5 फीट तक खोला गया है। रेणुका नदी पर बने ऐतिहासिक गोविंद वल्लभ पंत सागर बांध (रिहंद बांध) के कमोबेश 11 फाटकों को खोले जाने की जानकारी मिली है। चोपन में सोन नदी पर बने पुल से कुछ ही नीचे तक बाढ़ का पानी पहुंच गया था। लेकिन देर शाम से बारिश के थम जाने से स्थित में फिलहाल सुधार होता दिखाई दे रहा है।
