📌हमास चीफ के तेहरान स्थित मकान पर हुए जबरदस्त मिसाइल हमले में हुई इस्माइल हनिया की मौत
Newspost, Global Desk.
इसराइल द्वारा हमास के विरुद्ध छेड़ी गई सैनिक मुहिम के बीच बुधवार को हमास ने एक बयान में संगठन के चीफ के मारे जाने की पुष्टि कर दी है। हमास द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि तेहरान स्थित इस्माइल हनिया के आवास पर इसराइली मिसाइल हमले से 62 वर्षीय हनिया और परिवार के अन्य सदस्यों की मौत हो गई। हालांकि इस हमले की अब तक किसी ने ज़िम्मेदारी नहीं ली है। यहाँ तक कि इसराइली व अमरीकी विदेश मंत्रालय ने भी इसे अब तक स्वीकार नहीं किया है। फिर भी बीबीसी, रॉयटर्स, अलज़ज़ीरा व मिडिल ईस्ट मीडिया की रिपोर्टिंग में ईरान सहित मिडिल ईस्ट के देशों में तनाव बढ़ गया है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र से इसराइल पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर दी है।
इस घटना के बारे में अब तक इसराइल के नेतनयाहू सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन वहां से एक मंत्री ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि ऐसे ही गंदगी साफ होगी।
हनिया की रिफ्यूजी कैंप से हमास प्रमुख तक की यात्रा
इस्माइल हनिया का जन्म 1962 में ग़ज़ा के पश्चिमी इलाके़ में एक शरणार्थी शिविर में हुआ था। माता-पिता साल 1948 में अरब-इसराइल युद्ध के दौरान अपना घर छोड़कर चले गए थे। हनिया का जन्म रिहैबिलिटेशन कैंप में हुआ था। युवावस्था में हनिया ने इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ़ ग़ज़ा में अरबी की पढ़ाई की और यहीं से वह इस्लामिक आंदोलन में शामिल हो गया था।
हनिया को 1993 में ग़ज़ा के इस्लामिक विश्वविद्यालय का डीन नियुक्त किया गया। हमास संस्थापक अहमद यासीन को 1997 में इसराइल ने रिहा किया था। इसके बाद हनिया को यासीन के सहायक के रूप में नियुक्त किया गया। इससे दोनों के बीच घनिष्ठता बढ़ी और हनिया का हमास के भीतर क़द बढ़ता गया। कुछ समय बाद ही उसे फ़लस्तीनी प्राधिकरण में इस समूह का प्रतिनिधि बनाया गया।
सितंबर 2003 में ग़ज़ा में इसराइली हवाई हमले में हनिया और अहमद यासीन बाल-बाल बच गए थे। लेकिन कुछ महीने के अंदर ही अहमद यासीन को मस्जिद से नमाज़ पढ़कर बाहर निकलते समय इसराइली गोलीबारी में मार दिया गया।
1980 के दशक के आख़िरी सालों में हमास आंदोलन का प्रमुख नेता होने के नाते इसराइल ने हनिया को 1989 में तीन साल के लिए कै़द रखा। सन 1992 में हमास के कई नेताओं के साथ हनिया को मार्ज-अल-ज़ुहुर निर्वासित कर दिया गया था। एक साल तक निर्वासित रहने के बाद वह ग़ज़ा लौटने के बाद 1997 में हमास आंदोलन के हार्ड लाइनर नेता शेख अहमद यासीन के कार्यालय में प्रमुख पद संभाला। इससे उसका प्रभाव बहुत बढ़ गया।
ग़ज़ा से इसराइली सेना की वापसी के एक साल बाद 2006 में फ़लस्तीनी संसदीय चुनाव हुए जिसमें हमास को जीत मिली।
हनिया को हमास ने 16 फरवरी, 2006 में फ़लस्तीनी प्राधिकरण का प्रधानमंत्री नामित किया। उन्हें राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इस पद के लिए नियुक्त किया लेकिन एक साल के अंदर ही यह पद गंवाना पड़ा। उस दौरान एक सप्ताह तक ग़ज़ा पट्टी में हिंसक घटनाएं हुईं जिससे हमास ने महमूद अब्बास की पार्टी को बर्ख़ास्त कर दिया और इसी के साथ हनिया फिलिस्तीन का पीएम नहीं रहा। लेकिन पीएम पद से हटाए जाने को असंवैधानिक क़रार दे दिया और ग़ज़ा में अपनी सत्ता को बतौर प्रधानमंत्री बरकरार रखा।
हनिया को 6 मई 2017 को हमास के पॉलिटिकल ब्यूरो का प्रमुख चुना गया। लेकिन साल 2018 में अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने हनिया को आतंकवादी घोषित कर दिया। इसके बाद पिछले कई सालों से हनिया क़तर में रह रहा था।
Source: BBC
