Newspost, Motivational Desk. Swami Dayanand Sharma.

     जो मनुष्य गिरकर उठने का सामर्थ्य रखता है उसे लक्ष्य तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता। जीवन में सफलता का मूल्यांकन कभी भी इस बात से नहीं हो सकता है कि हमने जीवन में कितनी ऊँचाई प्राप्त की अपितु इस बात से होना चाहिए कि हम जीवन के कर्तव्य पथ पर कितनी बार गिर कर खड़े हुए हैं।

  सफल जीवन और असफल जीवन में बल और बुद्धि का अंतर नहीं होता। बल और बुद्धि तो असफल लोगों में भी मिल जाती है इसलिए उनके बीच दृढ़ इच्छा शक्ति का ही मूल अंतर होता है। किसी व्यक्ति की सफलता का मूल्यांकन उसकी गिर कर उठने की क्षमता से ही किया जाना चाहिए। 

    जीवन में ऊँचाइयों तक पहुँचना बड़ी बात नहीं पर बार-बार गिरने के बाद भी ऊँचाइयों की उड़ान भरना बहुत बड़ी बात है। जिस दिन आदमी अपने द्वारा दूसरों को दी जाने वाली सलाह पर स्वयं चलना सीख जायेगा, उसी दिन उसकी सफलता भी सुनिश्चित हो जायेगी।

सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल

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