?️?? शुभ शुक्रवार ???️
Newspost, Spiritual Desk, shared by Swami Dayanand Sharma.
उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः।
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः॥
केवल इच्छाशक्ति से कार्य नहीं सिद्ध होते हैं, बल्कि प्रयास के द्वारा ही सफलता प्राप्त होती है। जैसे कि एक सोते हुए सिंह के मुँह में हिरण नहीं घुसते, उसी प्रकार मनोरथों से कार्य नहीं सिद्ध होते हैं।संसार में अनेक प्रकार के सुख हैं पर सफलता का सुख सबसे बड़ा है। सफलता मिलने से आत्मबल में असाधारण वृद्धि होती है।
सफलता अपने साथ अनेक प्रकार की सम्पदा भी साथ ले कर आती है, जिनके वैभव से मनुष्य का मन, शरीर और घर जगमगाने लगता है। जिसने सफलता प्राप्त की, उसके गले में लक्ष्मी की वरमाला पड़ती है, संसार उसके आगे मस्तक झुका देता है। उसके दोष भी गुण बन जाते हैं। यही तो धरती पर स्वर्ग है।
धरती पर स्वर्ग से तात्पर्य ऐसे स्थान से होता है जहाँ सभी को समान रूप से अपने परिश्रम का फल मिलता है, जहाँ हर तरह की सुख-सुविधाएँ हों। जहाँ मानव शांति पूर्वक जीवन यापन करे। जो वस्तु जितनी ही उत्तम है वह उतने ही कठिन प्रयास से मिलती है।
<आज लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की पुण्यतिथि है। Newspost Global Team उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करती है!>
