मंथन: ऐसे ‘समर्थ’ को ही ‘दोष’ नहीं होता जो सभी को ‘सम’ यानी ‘समान समझते हैं’..!
पथ प्रदर्शक कवि तुलसीदास जी ने रामचरित्र मानस के बाल काण्ड में निम्न पंक्तियों का उल्लेख किया है.. ‘समरथ को नहीं दोष गुसाईं ,रवि पावक सुरसरि की नाई’ Newspost, Inspirational/Spiritual…
