दबंगों के प्राण घातक हमले में मोतीचंद की मौत, पत्नी व पुत्र -पुत्री गंभीर
7 साल पहले दिया गया था अवैध कब्जा हटाने का आदेश, प्रशासन ने अब चलाया बुलडोजर
पुलिस, ननि व प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में
Newspost, MP Regional Desk, Singrauli.
सिंगरौली, मध्य प्रदेश। विंध्यनगर थाना क्षेत्र के ग्राम गहिलगढ़ में जमीनी विवाद का अंत बहुत ही अप्रिय हुआ। लगभग एक दशक से चल रहे इस विवाद का क्लाइमैक्स इतना दुखांत है जिसमें वादी की जान चली गई और प्रतिवादी का पूरा परिवार चला गया जेल। पूरे प्रकरण का अंत शुक्रवार, 28 जून 2024 को तब हुआ जब गुरुवार, 27 जून को घटित एक हिंसक घटना में गंभीर रूप से घायल मोतीचंद की उपचार के दौरान मौत हो गई। हुआ यूं कि गुरुवार को अवैध कब्ज़ाधारक सरहंग अपने परिवार के लोगों के साथ वास्तविक जमीन मालिक के घर में घुसा और उसके परिवार पर लाठी डंडे व अन्य हथियारों से प्राणघातक हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल जमीन मालिक मोतीचंद की उपचार के दौरान मौत हो गई। जबकि बुरी तरह से घायल उसकी पत्नी, बेटा व बेटी की हालत स्थिर बताई गई है। पुलिस ने घटना के बाद त्वरित कार्यवाही करते हुए सभी हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर लिया तथा आरोपियों के अवैध मकान को भी ध्वस्त करा दिया।
घटना के बारे में इन्होंने बताया-
घटना की जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिव कुमार वर्मा ने बताया कि घटना दिनांक 27 जून को प्रातः 9 बजे आरोपी शत्रुधन सिंह पुत्र दोमन सिंह उम्र 55 वर्ष, उसके दो पुत्र चन्दन सिंह उम्र 28 वर्ष, रंजन सिंह व पत्नी गीता सिंह मृतक मोतीचंद शाह पुत्र नान्हू उम्र 60 वर्ष , उसकी पत्नी मंशा देवी उम्र 55 वर्ष, पुत्र जीतेन्द्र शाह उम्र 26वर्ष, पुत्री सरस्वती शाह उम्र 20 के ऊपर प्राणघातक लाठी डंडे से प्राणघातक हमला कर दिया तथा गंभीर रूप से मारपीट कर घायल कर दिया। श्री वर्मा ने आगे बताया कि मारपीट में गंभीर रूप से घायल मोतीचंद को उपचारार्थ जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया था। वहाँ 28 जून की प्रातः मोतीचंद की मौत हो गई। जबकि अन्य लोगों की हालत स्थिर है, उनका उपचार चल रहा है। मोतीचंद की मौत की खबर के बाद विंध्यनगर पुलिस ने त्वरित दबिश देकर सभी हत्या आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 294, 506, 34, 149, 452, 307, 302 का मामला दर्ज किया है।
•Addl SP SK Verma said…
हत्यारोपी के घर पर प्रशासन ने चलवाया बुलडोजर
चिकित्सा के दौरान मोतीचंद की मृत्यु की सूचना वायरल होते ही सिंगरौली विधायक राम निवास शाह, सीडा के पूर्व उपाध्यक्ष नरेश शाह, आप नेता अक्षय शाह सहित अन्य लोग जिला चिकित्सालय पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की मांग की। इसके बाद जिला प्रशासन एक्शन में गया। नगर निगम ने अमले को हत्यारोपी के घर को ध्वस्त करने के लिए रवाना कर दिया। पुलिस बल के साथ ननि अमला शुक्रवार को प्रातः 10 बजे ग्राम गहिलगढ़ पहुँचा और आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलाकर उसे ध्वस्त कर दिया। बुलडोजर कार्यवाही लगभग 3 घण्टे तक चली। तनावपूर्ण माहौल से निपटने के लिये भारी संख्या में पुलिस बल, ननि व जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी वहां मौजूद रहे। बुलडोजर कार्यवाही में आरोपी के घर के साथ ही जबरन कब्ज़ा की गई भूमि पर निर्मित मकान को भी ध्वस्त कर दिया गया।
डीएम, कमिश्नर व हाईकोर्ट से केस जीतने पर भी नहीं मिली जमीन, मिली मौत
पीड़ित पक्ष के अनुसार, हत्यारोपी लोगों ने मृतक के घर के बगल में खाली पड़ी उसकी भूमि पर धीरे धीरे कब्ज़ा जमा कर वहां घर बना लिया। उसे रोकने फरियादि द्वारा कई बार थाने में रिपोर्ट किया जाता रहा, लेकिन आरोपी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की गई। दबंग शत्रुधन से परेशान मृतक ने न्यायालय की शरण ली। वह कलेक्ट्रेट, कमिश्नरेट व हाईकोर्ट से केस जीत भी गया और जमीन पर फिर से कब्जा दिये जाने के पक्ष में आदेश भी लाया था। लेकिन पुलिस व जिला प्रशासन के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने उन आदेशों को अनदेखा कर दिया।
बताया गया कि घटना दिवस गुरुवार को मोतीचंद (मृतक) अपने जमीन का वीडियो बना रहा था, जो आरोपी को नागवार लगा और उसने अपने दोनों पुत्र व पत्नी के साथ पीड़ित पक्ष के घर में घुसकर प्राण घातक हमला कर दिया जिसमें मोतीचंद की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों के अनुसार अब से 7 वर्ष पूर्व एसडीएम सिंगरौली ने उक्त जमीन पर कब्ज़ाधारी आरोपी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए अवैध मकान को गिराने का आदेश दिया था। लेकिन उक्त आदेश का पालन न तो पुलिस ने कराया, न ही ननि व अन्य प्रशासनिक अमले ने सहयोग किया। परिजनों ने बताया कि वे आदेश की कॉपी लेकर ननि व जिला प्रशासन के दफ्तरों में दौड़ते रहे। लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई।
उक्त घटना के बाद अब यह कयास लगाया जा रहा है कि शायद पुलिस, ननि व प्रशासन के जिम्मेदार लोगों को अब कुछ सबक मिले। फिलहाल लोग लापरवाह और भ्रष्ट कार्यप्रणाली को भी मोतीचंद की हत्या का एक कारण मान रहे हैं।
