भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संस्थापक परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने शंकराचार्य के बयान की निंदा की

Newspost, Shri Ram Desk. @RohitGupta 

मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के ब्योहारी में स्थित भगवती मानव कल्याण संगठन एवं पंचज्योति शक्तितीर्थ सिद्धाश्रम ट्रस्ट के संस्थापक परमहंस योगीराज श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने सोशल मीडिया में लाइव आकर कहा कि 500 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद अयोध्या में हर्षोल्लास के साथ रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह की तैयारी चल रही है। पूरा समाज इस उत्साह से आंदोलित है। विश्व के अनेकों देश इस आयोजन के साक्षी बनने का प्रयास कर रहे हैं, वहां भी उत्साह का माहौल है। लेकिन जिस तरह से शंकराचार्य द्वारा समाज में एक द्वंद निर्मित किया जा रहा है, उसका लाभ सनातन विरोधी ताकतें उठा रही हैं।

उन्होंने कहा कि, शंकराचार्य द्वारा आवाज उठाई गई कि नरेंद्र मोदी एक योग्य यजमान नहीं हैं। कुछ लोगों ने उनकी जाति को लेकर भी आपत्ति जताई, यह चिंताजनक है। शक्तिपुत्र जी महाराज ने इसका पूरी तरह से खंडन किया और कहा कि नरेंद्र मोदी वर्तमान में सबसे योग्य यजमान हैं। उन्होंने अपना जीवन राष्ट्र और सनातन धर्म को समर्पित किया है। वह ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले हैं और एक साधक भी हैं। वह इस आंदोलन से जुड़े भी रहे हैं और उनसे विराट व्यक्तित्व वाला यजमान वर्तमान में कोई मिल भी नहीं सकता है। व्यक्ति कर्म से योग्य होता है जाति से नहीं। हमारे शंकराचार्य को इस तरह की ओछी मानसिकता से ऊपर उठना चाहिए।

वहीं मुहूर्त को लेकर उठ रहे सवाल पर भी गुरुवर ने कहा कि जब माता आदिशक्ति जगत जननी जगदंबा के आशीर्वाद से रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही हो, तब किसी भी समय प्राण प्रतिष्ठा की जा सकती है। प्राण प्रतिष्ठा से वह समय भी एक मुहूर्त के रूप में प्रतिष्ठित हो जाएगा। गोवर्धन पीठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी द्वारा कहा गया कि शास्त्र सम्मत प्राण प्रतिष्ठा नहीं की जाएगी तो डाकिनी साकनी आदि असुरी शक्तियों का प्रवेश विग्रह में हो जाता है। इस बात का खंडन करते हुए शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि यह किस तरह के त्रिकालदर्शी हैं ? क्या उन्हें दिखाई नहीं दे रहा कि जिस क्षेत्र की सुरक्षा स्वयं हनुमान जी कर रहे हों वहां कभी असुरी शक्तियां प्रवेश नहीं कर सकती हैं।

नरेंद्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ सामान्य आत्माएं नहीं

पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती द्वारा नरेंद्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ को लेकर कई अनावश्यक बातें की गईं जिसे लेकर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि नरेंद्र मोदी एवं योगी आदित्यनाथ सामान्य आत्माएं नहीं हैं। वह भगवान श्रीराम की प्रेरणा से कार्य कर रहे हैं। सच्चिदानंद भगवान के निर्देशन में ही कार्य कर रहे हैं। क्या आप चाहते हैं कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का कार्यभार आजम खान जैसे लोग देखें। पूर्व में प्रयाग कुंभ के प्रभारी आजम खान जैसे लोग होते थे। चित्रकूट के लिए मार्ग निर्माण में भी बाधक रहते थे। वहीं जोशी मठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी द्वारा भी कहा गया कि हमारा जब समय आएगा तब देखेंगे। इस पर भी महाराज जी ने कटाक्ष किया कि इससे उपयुक्त समय अब नहीं आने वाला कांग्रेस समाजवादी पार्टी तमाम सनातन धर्म द्रोही राजनीतिक दलों से इस तरह के आयोजन की अपेक्षा नहीं की जा सकती।

शंकराचार्य द्वारा यह भी कहा गया कि मंदिर का निर्माण अधूरा है, अभी वहां प्राण प्रतिष्ठा का कार्य शास्त्र सम्मत नहीं है। प्राण प्रतिष्ठा के बाद मंदिर में मजदूर नहीं चढ़ेंगे ? इस बात को लेकर श्री शक्तिपुत्र जी महाराज ने कहा कि निर्माण कार्य या स्वच्छता को लेकर कई बार मजदूर मंदिरों के ऊपर चढ़ते हैं उससे भगवान को कोई आपत्ति नहीं है। कई बार रंग रोगन के लिए या फिर मंदिर के ऊपर स्वच्छता के लिए अनेकों बार मजदूर चढ़ते हैं। अगर भगवान की मूर्ति का भी सहारा लिया जाए तो भी कोई गलत नहीं होगा, क्योंकि वह एक सकारात्मक और निर्माण का कार्य है। शंकराचार्य को वैसे तो इस आयोजन में जाना चाहिए था और चारों शंकराचार्य को एकमत होकर देश के प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से कोई ना कोई मांग रखनी चाहिए थी। चाहे गौ संरक्षण की बात हो या फिर युवाओं को नशे के दलदल में फंसने से बचाने के लिए देश प्रदेश में नशे की सामग्रियों पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग रखी जा सकती थी। शंकराचार्य किन्हीं परिस्थितियों के कारण राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में अयोध्या नहीं पहुंच पा रहे हैं, लेकिन उनके द्वारा किसी भी तरह की नकारात्मक बातें नहीं कहनी चाहिए। सभी शंकराचार्य यदि 22 जनवरी को अयोध्या न पहुंच रहे हों तब भी वे जिस स्थान में हों वहीं से राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह उत्साह में सम्मिलित होना चाहिए ताकि देश में सनातन धर्म में एकता की भावना प्रदर्शित हो। इस आयोजन को ऐतिहासिक उत्साह के रूप में जनमानस को मनाने की प्रेरणा देनी चाहिए।

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