Newspost, Spiritual Desk, Swami Dayanand Sharma.
मनुष्य के जीवन में अंतिम क्षणों तक जीवन परिवर्तन की संभावना के द्वार सदा खुले रहते हैं। वह चाहे तो सदैव अपने जीवन को उत्कृष्ट से उत्कृष्ट अथवा निकृष्ट से निकृष्ट बना सकने में समर्थ होता है। मनुष्य जीवन के अलावा अन्य सभी प्राणी प्रकृति के ही अधीन होते हैं।
अब उसमें अपने जीवन परिवर्तन की कोई संभावना बाकी नहीं रह जाती है। मनुष्य अपने संग से, अपने संस्कारों से एवं अपने परिवेश से जीवन को परिवर्तित करने में सक्षम होता है।
यदि कुसंग से अपना पतन भी करा सकता है तो सुसंग से जीवन उन्नति एवं कल्याण के मार्ग पर भी बढ़ सकता है। उस प्रभु ने कृपा करके आपको मनुष्य बनाया है तो फिर श्रेष्ठ पथ का अनुगमन करते हुए श्रेष्ठ का ही चिंतन करते हुए और श्रेष्ठ व्यक्तित्व का निर्माण करते हुए अपने जीवन को भी श्रेष्ठ बनाया जाए।
सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल
