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कब और क्यों मनाया जाता है गंगा दशहरा..? उपलब्ध है इसके बारे में पूरी जानकारी… 

जगत की धात्री मां गंगा के अवतरण दिवस को मनाया जाता है गंगा दशहरा। इस दिन माँ गंगा की पूजा-उपासना की जाती है। इसके लिए साधक ब्रह्म बेला में पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। शास्त्रों में निहित है कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मां गंगा का अवतरण भूलोक पर हुआ था। अतः हर वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मनाया जाता है।

गंगा दशहरा - हर वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन गंगा दशहरा मनाया जाता है। इस दिन जगत की धात्री मां गंगा की पूजा-उपासना की जाती है। इसके लिए साधक ब्रह्म बेला से पवित्र गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं। इसके पश्चात विधि-विधान से मां गंगा की पूजा करते हैं। शास्त्रों में निहित है कि ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मां गंगा का अवतरण भूलोक पर हुआ था। अतः हर वर्ष ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर गंगा दशहरा मनाया जाता है। धार्मिक मत है कि गंगा नदी में स्नान-ध्यान करने से व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर में किए गए सकल पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही मां गंगा की कृपा से साधक को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। 

आइए, गंगा दशहरा की तिथि, मुहूर्त एवं योग जानते हैं-

शुभ मुहूर्त: ज्योतिषीय गणना के अनुसार ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 16 जून को देर रात 02 बजकर 32 मिनट पर शुरू होगी और अगले दिन 17 जून को ब्रह्म मुहूर्त में 04 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। नोट करें यह तिथि अंग्रेजी कैलेंडर पर आधारित है। सनातन धर्म में सूर्योदय से तिथि की गणना की जाती है। अत: 16 जून को गंगा दशहरा मनाया जाएगा।

गंगा दशहरा पर वरीयान योग का निर्माण हो रहा है। वरीयान योग संध्याकाल 09 बजकर 03 मिनट तक है। इसके बाद परिघ योग का निर्माण हो रहा है। इसके अलावा, ज्येष्ठ माह में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और अमृत सिद्धि योग के भी संयोग बन रहे हैं। इन योग में गंगा स्नान करने से साधक को अक्षय फल की प्राप्ति होगी।

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