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आज का संदेश

Newspost, Spiritual Desk. Shared by- Swamy Dayanand Sharma

     धूप से मुरझाये पौधे के लिए थोड़ा सा जल जीवनदायी बन जाता है एवं नैराश्य की आँच से संतप्त व्यक्ति के लिए थोड़ा सा सहारा प्राणदायी बन जाता है। मनुष्य को उस ईश्वर ने एक सामाजिक प्राणी बनाया है।   
        समाज में घट रही प्रत्येक अच्छी-बुरी घटना के प्रति संवेदनशील रहना ही हमें और अधिक सामाजिक बनाता है। अपने साथ-साथ समाज में रह रहे अन्य लोगों की वेदनाओं की चुभन हमारे हृदय में भी होनी ही चाहिए। सामाजिक प्राणी होने का अर्थ केवल इतना नहीं कि मनुष्य समाज के बीच में रहता है अपितु यह है कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी भी हमारी होनी चाहिए।

   जो लोग निराशा में, विषाद में अथवा तो अभाव में अपना जीवन जी रहे हैं अपनी सामर्थ्यानुसार उनसे जुड़े रहना ही हमें और अधिक मानवीय बनाकर एक स्वस्थ समाज के नवनिर्माण में अपना योगदान देता है।

एक ‌ऐसा चाहिए..!

     जिंदगी में एक ऐसे इंसान का होना बहुत ज़रूरी है जिसको दिल का हाल बताने के लिए शब्दों की ज़रूरत न पड़े। विश्वास किसी पर इतना करें कि वो छलते समय खुद को दोषी समझे और प्रेम किसी से इतना करें कि उसके मन में सदैव तुम्हें खोने का डर बना रहे।

      अच्छे समय से ज्यादा, अच्छे इंसान के साथ रिश्ता रखें। अच्छा इंसान अच्छा समय ला सकता है लेकिन अच्छा समय अच्छा इंसान नहीं ला सकता। इन्सान को अपनी जड़ों को कभी नहीं भूलना चाहिए। हमेशा उस पर गर्व करना चाहिए जहां से हमने जन्म लेकर जीवन के जीने के कौशल को सीखा।

   हमें पुरानी यादों को सदैव अपने जीवन में सहज कर पुराने लोगों का साथ भी देना चाहिये। अगर हम केवल चमक दमक की दुनिया में आगे बढ़ने में लगे रहें और पुराने रिश्तों कों भूलते गये तों आज नहीं तों कल असफलता का मुंह देखना पड़ेगा।

सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल

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