|| प्रकृति का स्वभाव |

Newspost, Motivation. Swami Dayanand Sharma.

     अर्जन और विसर्जन ये मनुष्य जीवन के दो अहम पहलू हैं। वृक्ष कभी इस बात पर व्यथित नहीं होता है कि उसने कितने फूल अथवा कितने पत्ते खो दिये। वह सदैव नये फूल और पत्तों के सृजन में व्यस्त रहता है। There are always flowers for those who want to see them. LOVE NATURE AND LIVE HAPPILY.

       नदियां भी कभी इस बात का शोक नहीं करती हैं कि प्रतिपल कितना - कितना जल प्रवाहित हो गया। वो सदैव उसी वेग में लोक मंगल हेतु प्रवाहमान बनी रहती हैं। उन्हें भी पता होता है कि हम जितना देंगे,उतना ही हमें प्रकृति द्वारा और अधिक दे दिया जायेगा।

      75% बिमारियों का मूल कारण नकारात्मक सोच से उत्पन्न ऊर्जा ही है। आज मनुष्य ही अपनी गलत सोच से भस्मासुर बन स्वयं का विनाश कर रहा है। अपनी सोच सदैव सकारात्मक रखें और प्रसन्न रहें! नकारात्मक सोच ही मनुष्य का असली शत्रु है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *