🕉️नवरात्र के प्रथम दिवस पर आप सभी को हार्दिक शुभ कामनाएँ🕉️
Newspost, Spiritual Desk. Swami Dayanand Sharma
नवरात्रि के प्रथम दिन उपासना में साधक अपने मन को मूलाधार चक्र में स्थित करते हैं। माँ शैलपुत्री का पूजन करने से मूलाधार चक्र जागृत होता है और अनेक सिद्धियों की प्राप्ति होती है. मां शैलपुत्री की पूजा से आरोग्य की प्राप्ति होती है और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। शैलपुत्री देवी दुर्गा के नौ रूप में पहले स्वरूप में जानी जाती हैं। ये ही नवदुर्गाओं में प्रथम दुर्गा हैं। पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में उत्पन्न होने के कारण इनका नाम 'शैलपुत्री' पड़ा। नवरात्र-पूजन में प्रथम दिवस इन्हीं की पूजा और उपासना की जाती है। इस प्रथम दिन की उपासना में योगी अपने मन को 'मूलाधार' चक्र में स्थित करते हैं। यहीं से उनकी योग साधना का प्रारंभ होता है।
माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र की देवी हैं। इस शक्ति को जागृत करने पर व्यक्ति आध्यात्मिक जागृति और जीवन में अपने उद्देश्य की यात्रा शुरू करता है। मूलाधार चक्र को सक्रिय किए बिना व्यक्ति के पास कुछ भी सार्थक करने की शक्ति और ताकत नहीं होती है। ऐसा कहा जाता है कि अनमोल मानव जीवन का पूरा उपयोग करने के लिए व्यक्ति को माँ शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए। इसलिए, नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के इस अवतार की पूजा की जाती है।

शैलपुत्री की पूजा के लिए इस मंत्र का जाप करें…
वन्दे वद्रचतलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्।।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डाय विच्चे ॐ शैलपुत्री देव्यै नम:।
स्तोत्र पाठ
प्रथम दुर्गा त्वंहि भवसागर: तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यम्॥
त्रिलोजननी त्वंहि परमानंद प्रदीयमान्।
सौभाग्यरोग्य दायनी शैलपुत्री प्रणमाभ्यहम्॥
चराचरेश्वरी त्वंहि महामोह: विनाशिनी ।
मुक्ति भुक्ति दायनीं शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥
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नवरात्रि के पहले दिन पूजी जाने वाली पहली नवदुर्गा हैं और देवी सती का पुनर्जन्म है। इन्हें सफेद रंग की चीजों का भोग (लगाना बेहद शुभ माना जाता है। यदि आप इस नवरात्र पर माता शैलपुत्री की पूर्ण कृपा प्राप्त करना चाहते हो, तो आपको उन्हें सफेद बर्फी, घर पर दूध से बनी शुद्ध मिठाई, हलवा, रबड़ी या मावे के लड्डू आदि चीजों का भोग लगाना चाहिए।

