? कांग्रेस ने सीधी से कमलेश्वर, सतना से सिद्धार्थ को किया लॉन्च, छिंदवाड़ा से नकुल नाथ मैदान में
Newspost, Editor’s Desk. @RohitGupta
नई दिल्ली/ सिंगरौली। आगामी महीने से संभावित आम चुनावों के कारण राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। सत्ता पक्ष बीजेपी अपने लिए 370 तथा एनडीए के लिए 400 पार का लक्ष्य लेकर 'फिर एक बार मोदी सरकार' के नारे के साथ जी- जान से जुटी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक एक सीट को साधने के लिए उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम को एक कर रखा है। बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से पार्टी ने 100 दिन मांगे हैं। यहाँ तक कि 195 उम्मीदवारों की सूची भी सबसे पहले बीजेपी ने ही सार्वजनिक की है। आज भाजपा ने दूसरी सूची भी जारी कर दी है। वहीं कांग्रेस ने व्यावहारिक परेशानियों के बीच अपनी पार्टी के उम्मीदवारों को लिस्ट जारी कर कुछ लोकसभा सीटों पर सीधे टक्कर देने की कवायद कर दी है। कांग्रेस ने छिंदवाड़ा से कांग्रेस के छत्रप कमलनाथ के पुत्र नकुलनाथ को टिकट देकर उनके भाजपा में सम्मिलित होने की अटकलों पर विराम लगा दिया है, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के विंध्य रीजन की सतना और सीधी लोकसभा सीटों पर क्रमशः सिद्धार्थ कुशवाहा एवं कमलेश्वर पटेल को लॉन्च कर यहां के चुनाव को रोमांचक बना दिया है।
कैसे होगा क्लीनस्वीप ? बीजेपी एमपी के लिए खड़ा हुआ सवाल
मध्य प्रदेश की कुल 29 लोकसभा सीटों में छिंदवाड़ा को छोड़कर 28 सीटें भाजपा को 2019 के चुनाव में मिली थीं। इस बार एमपी भाजपा के लिए इसलिए भी चुनौती है कि संगठन के दायित्ववान कार्यकर्ता न केवल मोदी जी और सनातन की आभा को लेकर फीलगुड कर रहे हैं, वरन् उनकी भाव भंगिमा भी पूरी तरह से बदली हुई है। संगठन के सभी कार्यक्रम शासन प्रशासन करवा रहा है। पार्टी संगठन के नेता और जन प्रतिनिधि अपनी असंवेदनशीलता के चलते ब्यूरोक्रेसी, कॉर्पोरेट और धनपतियों के खास और आमजन से कटते चले जा रहे हैं, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। इसका प्रभाव इस चुनाव में भले ही कितना भी हो, लेकिन यह रवैया पार्टी को अपने 2047 के लक्ष्य तक पहुंचने में कितना बाधक होगा, यह समय बताएगा।
सतना और सीधी लोकसभा का चुनाव
विंध्य क्षेत्र के सतना से सांसद रहे गणेश सिंह पटेल को एमपी के 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उतारा था। लेकिन वे विधानसभा चुनाव हार गये थे। अब पार्टी ने उन्हें फिर से लोकसभा की टिकट दे दी है। सतना के सूत्रों के अनुसार गणेश सिंह के समानांतर कांग्रेस ने सिद्धार्थ कुशवाहा को खड़ा कर दिया है। सिद्धार्थ के लोकसभा चुनाव में भी सामने आ जाने तथा गणेश सिंह के प्रति एंटी इंकंबेसी की स्थिति में केवल मोदी जी के नाम और सनातन के प्रवाह का ही सहारा है। दूसरी ओर सीधी से अलोकप्रिय माने जाने वाले कैंडिडेट डॉ राजेश मिश्रा को भाजपा ने चुना है। चर्चा है कि यह टिकट पूर्व सांसद व सीधी की वर्तमान विधायक रीती पाठक के प्रयास से मिली है। सीधी सीट में दो जिले सीधी व सिंगरौली पूर्ण रूप से आते हैं। डॉ राजेश मिश्रा से सीधी शहर के बाहर पार्टी संगठन को छोड़कर आम मतदाता लगभग अपरिचित और अनभिज्ञ है। दूसरी ओर सिंगरौली जिले में भाजपा का गढ़ माने जाने वाले, लगभग 50 हजार मतदाताओं वाले मोरवा नगर को कोयला खनन के लिए उजाड़े जाने की योजना बनाई गई है। इससे लगभग 80 प्रतिशत यहाँ आबाद निम्न मध्यम वर्ग व गरीब परिवार अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में कांग्रेस द्वारा सिहावल के पूर्व विधायक व प्रदेश सरकार में मंत्री रहे कमलेश्वर पटेल को टिकट दिए जाने से यहाँ संघर्ष की स्थिति बन गई है। कमलेश्वर की लोकप्रियता का ग्राफ लोकसभा क्षेत्र में काफी ऊपर है। यह कहा जा सकता है कि एमपी में कांग्रेस बुरी तरह से टूट फूट गई है। भाजपा के पक्ष में प्रधानमंत्री मोदी जी का कद, केन्द्र व प्रदेश की योजनाएं और जागा सनातन है। लेकिन भाजपा के स्थानीय संगठन इन सब के कारण ही नितांत औपचारिकता का निर्वाह कर रहे हैं। इनकी शिथिलता तथा नैतिकता के पक्षधर, निष्ठावान वरिष्ठ जनों से बनाई गई दूरी भाजपा व एनडीए के लक्ष्य को प्राप्त करने में बाधक भी बन सकता है।
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