संत की वाणी
Newspost, Spiritual Desk. Shared by- Swami Dayanand Sharma
असंतोषी मन इस संसार का सबसे दुःखी मन है। जिस मन में संतोष नहीं वह बहुत कुछ प्राप्ति के बाद भी अतृप्त ही रहेगा। जानना होगा कि धन के बल पर भोग अवश्य प्राप्त हो जाते हैं लेकिन तृप्ति की प्राप्ति नहीं हो सकती है।
धन के बल पर पूरे संसार के भोगों को प्राप्त करने के बाद भी आप अतृप्त ही रहेंगे। रिक्तता, खिन्नता, विषाद, अशांति तुम्हारा पीछा नहीं छोड़ेगी। असंतोष के कारण ही मानव पाप और निम्न आचरण करता है। एक मात्र संतोष ही मानव मन को प्रसन्न रख सकता है।
भगवान श्रीकृष्ण पर विश्वास हो तो अभाव में भी कृपा का और प्रत्येक क्षण आनन्द का अनुभव होगा। विषय के लिए नहीं वासुदेव के लिए जियें। विषय भोग से आज तक कोई तृप्त नहीं हो पाया। प्रभु चरणों के आश्रय से ही जीवन में तृप्ति का अनुभव किया जा सकता है।
संत सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल
