अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन के दौरान कंपनी के अधिकारियों का फूंका था पुतला
मुकदमा दर्ज, गिराया आशियाना
Regional News Desk, RB Singh ‘Raaz’, सीधी/ सिंगरौली.
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में देश के सबसे बड़े उद्योग समूह अडानी ग्रुप के खिलाफ लोग सड़कों पर उतरे हुए हैं तथा लगातार एक पखवाड़े से अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन कर विरोध जता रहे हैं।
विरोध जताने वाले ये कोई बाहर के लोग नहीं हैं बल्कि अडानी ग्रुप को दी गई जमीनों के वो विस्थापित भूमि स्वामी हैं जिन्हें अपने जायज हक के लिए लड़ाई लड़ने और संघर्ष करने के लिए इस बारिश के मौसम में भी घर-बार छोड़कर दिन-रात एक करना पड़ रहा है।
बीते एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत जाने के बाद अपने न्याय और हक के लिए संघर्षरत इन विस्थापितों को हर तरफ से खुद को निहत्था ही महसूस करना पड़ रहा है। अपने सिद्धांतों और गरीबों की लड़ाई लड़ने की दुहाई देने वाले राजनीतिक दल के लोग और निर्वाचित जन प्रतिनिधि भी ऐसे मामले में किनारा करके मौन हैं।
बीते एक पखवाड़े से अधिक का समय बीत जाने के बाद अपने न्याय और हक के लिए संघर्षरत इन विस्थापितों को हर तरफ से खुद को निहत्था ही महसूस करना पड़ रहा है। अपने सिद्धांतों और गरीबों की लड़ाई लड़ने की दुहाई देने वाले राजनीतिक दल के लोग और निर्वाचित जन प्रतिनिधि भी ऐसे मामले में किनारा करके मौन हैं।
सारे जिम्मेदार क्यों मौन हैं ?
बताते चलें कि सिंगरौली जिले में धिरौली व सुलियरी कोल ब्लाक के विस्थापितों का एक पखवाड़े से अधिक से धरना प्रदर्शन जारी है। सुलियरी कोल माइंस से विस्थापित हुए लोग पिछले दो वर्षों से अपनी मांगो को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। जहां कंपनी प्रबंधन व जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर लॉलीपाप देकर धरना को समाप्त करा दिया जाता था और विस्थापितों की मांगों को नजरअंदाज कर अपने कामों को कंपनी प्रबंधन द्वारा प्राथमिकता दिया जाता रहा। इस बार फिर से विस्थापित परिवार अपनी मांगो को लेकर अनिश्चितकालीन धरना पर बैठे हुए हैं। लेकिन विस्थापित परिवार की समस्याओं का निराकरण न तो जिला प्रशासन और न ही कंपनी प्रबंधन के द्वारा किया जा रहा है। यहां तक कि सत्ता पक्ष के विधायक, सासंद आज दिन तक पूछने नहीं गए कि सुलियरी कोल माइंस से विस्थापित हो रहे परिवारों की क्या समस्या है ?

अदानी के अधिकारियों का फूंका पुतला
विगत दिनों अपने हक की लड़ाई लड़ रहे इन विस्थापितों ने माइंस एरिया में घुसकर कंपनी के दो अधिकारियों क्लस्टर हेड बच्चा प्रसाद तथा साइट हेड राजकिशोर सिंह का विधिवत पुतला बनाकर उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुतला दहन किया। इस दौरान लोगों ने इन दोनों कंपनी के अधिकारियों के जलते हुए पुतले को अपने पैरों तले रौंदा और आक्रोश से भरी नारेबाजियां कीं।
बीते रविवार की शाम गुस्साए विस्थापितों ने माइंस के अंदर घुसकर कंपनी के कामकाज को बंद कराते हुए अपने लंबित हक को पूरा किए जाने की मांग करने लगे। जिसकी जानकारी कंपनी प्रबंधन को होने पर इसकी सूचनी तत्काल जिला प्रशासन व एसपी मो. यूसुफ कुरैशी को दी गई। जहां एसपी ने कोतवाली बैढऩ सहित माड़ा, जियावन व सरई से भारी मात्रा में बल भेजकर किसी तरह से मामले को शांत कराया।
उधर बीते रविवार की घटना को लेकर कंपनी प्रबंधन द्वारा विस्थापन की मांगों के निराकरण करने की पहल करना तो दूर उल्टा इन विस्थापितों के खिलाफ लंघाडोल थाने में विभिन्न धाराओं 341,147,447,149 के तहत मामला पंजीबद्ध करा दिया गया।
कंपनी की इस दमनकारी कार्यवाही के उपरांत भी अपनी पैतृक जमीनों को लूट-पिटा महसूस करते हुए विस्थापितों द्वारा लगातार धरना प्रदर्शन किया जाता रहा।
इधर कंपनी प्रबंधन द्वारा दबाव बनाया जा रहा है कि धरना समाप्त कर दो वरना और भी कई तरह के मुकदमे पंजीबद्ध कराकर जेल भेज दिया जाएगा।
विस्थापितों ने कहा-
इधर विस्थापितों का कहना है कि कंपनी प्रबंधन द्वारा सबसे पहले हम 9 गांव से विस्थापित हुए लोगों की मांगे पूरी की जाएं, साथ ही हम विस्थापितों के ऊपर हुए फर्जी मुकदमें को वापस लिया जाए तभी धरना प्रदर्शन समाप्त किया जाएगा। जब तक हम लोगों की मांगे पूरी नहीं हो जाती तब तक धरना प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा।
लगभग 95 प्रतिशत आदिवासी परिवार होंगे विस्थापित: देवी
अभी 16 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। जिसमें धिरौली कोल माइंस में लगभग 95 प्रतिशत आदिवासी जनसमुदाय के लोग विस्थापित होंगे। जिनकी कंपनी और प्रशासन के साठगांठ से आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। जिनके जमीन का प्रतिकर आज के मंहगाई के हिसाब से मात्र 4 लाख निर्धारण किया गया है।

अभी 16 दिन से धरना प्रदर्शन जारी है। जिसमें धिरौली कोल माइंस में लगभग 95 प्रतिशत आदिवासी जनसमुदाय के लोग विस्थापित होंगे। जिनकी कंपनी और प्रशासन के साठगांठ से आदिवासियों की जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। जिनके जमीन का प्रतिकर आज के मंहगाई के हिसाब से मात्र 4 लाख निर्धारण किया गया है।
देवी सिंह खैरवार, सरपंच, मझौली पाठ


न नौकरी, न पुनर्वास: दिलीप
एपीएमडीसी सुलियरी कोल माइंस में अवॉर्ड 2018 में किया गया है लेकिन आज तक मुआवजा पूरी तरह से वितरण नहीं हो पाया है। सुलियरी कोल माइंस में लगभग 2500 से ज्यादा लोग काम कर रहे है। जबकि स्थानीय टोटल 150 लोगो को भर्ती किया गया है और नौकरी भी नहीं दिया जा रहा है। अभी तक पुनर्वास कालोनी पालिसी के तहत बिना विस्थापन का सुविधा दिए ही पुलिस बल लेकर घर से बेघर किया जा रहा है।
दिलीप शाह, सरपंच, झलरी

कमजोर विस्थापितों के खिलाफ जिला बदर की कार्यवाही के प्रयास: दीपेन्द्र
यहां पर लोकतंत्र एवं मौलिक अधिकारों का हनन किया जा रहा और अपने जायज मांगों को मांगना विस्थापितों पर भारी पड़ रहा है। कंपनी की ओर से कमजोर विस्थापितों पर मुकदमा दर्ज कर जिला बदर की कार्यवाही की जा रही है। ताकि गरीबों के जमीन को प्रशासन की सह पर कंपनी हड़प सके। एपीएमडीसी सुलियरी कोल माइंस एवं धिरौली कोल माइंस से हो रहे विस्थापितों की आवाज बनकर मैं खड़ा रहूंगा।
दीपेन्द्र शाह, विस्थापित नेता

कंपनी द्वारा बिना मुआवजा भुगतान किये शनिवार को पुलिस के बल पर जबरदस्ती गरीबों का आशियाना उजाड़ रहा है। सीपीआई नेता संजय नामदेव ने जानकारी साझा करते हुये बताया कि बरसात के मौसम में कोर्ट के आदेश के बावजूद जबरदस्ती मकान गिराया जा रहा है मौके पर बरगवां नवानगर व मोरवा थाना प्रभारी सहित नायब तहसीलदार सरई, टीएच डीसी के एके शर्मा, सुलियरी कोल माइंस के कर्मचारी अधिकारी मिलकर विशेष चंद गुप्ता व उसके परिवार का घर जबरदस्ती तोड़ दिये हैं।
विस्थापितों की मांगों को पूरा करने कंपनी को दी गई है हिदायत: कलेक्टर

विस्थापितों की ओर से किए जा रहे धरना प्रदर्शन के संबंध में कंपनी प्रबंधन को निर्देशित किया गया है। विस्थापितों की जो मांगे हैं उसे पूरा करने की हिदायत कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई है।
अरुण परमार, कलेक्टर- सिंगरौली.
