?️?? शुभ प्रभात ???️

आज का संदेश

प्रस्तुतकर्ता: दयानंद शर्मा

        संतान की परवरिश किसी "साधना" से कम नहीं होती है और माता-पिता की सेवा किसी भी "आराधना" से कम नहीं होती है। कोई भी माता-पिता यह नही कहते कि हमें खुश रखना, वो तो यही कहते है कि बेटा तू सदा खुश रहना। जीवन में रिश्ते बड़े नहीं होते, रिश्तों को निभाने वाले बड़े होते है।

       घड़ी की सुईयों की तरह जीवन में अपने आपसी रिश्तों को बनाए रखें। धनवान बनने के लिए,एक-एक कण का संग्रह करना पडता है औऱ गुणवान बनने के लिए एक-एक क्षण का,सदुपयोग करना पडता है। इस जीवन का पैसा अगले जन्म में काम नहीं आता व मगर इस जीवन का पुण्य जन्मो जन्म तक काम आता है।

        इन्सान उन चीजों से कम बीमार होता है, जो वो खाता है ज्यादा बीमार वो उन चीजों से होता है,जो उसे अन्दर ही अन्दर खाती रहती हैं कम सोचें पर सही सोचें। जो बात-बात में गरम हो जाए,उलझ जाए और हिम्मत हार जाए, वह व्यक्ति कांच के समान होता है। जो विपरीत परिस्थिति में भी ठंडा रहे,वही व्यक्ति हीरा है।

सुरपति दास
इस्कॉन

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