Newspost, Political Desk. Mumbai.
भारत के सबसे अधिक सालाना बजट वाले नगर निगम- बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) समेत महाराष्ट्र की 29 नगर निगमों के लिए मतदान की प्रक्रिया गुरुवार शाम तक शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई।बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) सभी वार्डों के काउंसिलर चुनाव के लिए मतदान की प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद जो अनुमान (Exit Polls) सामने आए हैं, उनको यदि नतीजे के तौर पर मान लें तो उद्धव व राज ठाकरे के गठबंधन और कांग्रेस के लिए कतई अच्छी खबर नहीं है।
एग्जिट पोल्स में बीएमसी की सत्ता महायुति गठबंधन (बीजेपी और शिवसेना - शिंदे गुट) को मिलती दिख रही है। यदि परिणाम ऐसे ही रहे तो उद्धव ठाकरे का आखिरी किला BMC ढह जाएगा। अगर यहां पार्टी हारती है तो कभी मुंबई के किंग कहे जाने वाली पार्टी के लिए हालात क्या होंगे, इसका अनुमान आप भी लगा सकते हैं।

हमने सामने आए तीन एग्जिट पोल्स का विष्लेषण किया है। तीनों में बीएमसी की सत्ता भारी बहुमत से बीजेपी के हाथ में जाने का अनुमान लगाया गया है। जेवीसी (JVC) के पोल के अनुसार बीजेपी 138 सीटें जीत सकती है। उद्धव का खेमा महज 59 सीटों पर सिमटता दिखाई दे रहा है। जबकि कांग्रेस को सिर्फ 23 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है।
जनमत (Janmat) पोल्स ने भी बीजेपी-शिवसेना गठबंधन की झोली में 138 सीटें डालीं हैं। वहीं उद्धव, राज ठाकरे और एनसीपी (शरद पवार) को अधिकतम 62 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। जनमत के अनुसार कांग्रेस को 20 सीटों से संतोष करना पड़ सकता है। एक और एजेंसी सकाल (Sakaal) पोल ने अपने एग्जिट पोल में बीजेपी-शिवसेना को बीएमसी चुनाव में 119 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। इसके अनुसार यूबीटी को 75 सीटें मिल सकती हैं। इस एग्जिट पोल ने कांग्रेस को 20 से कम सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। बता दें बीएमसी के 227 वॉर्ड हैं और बहुमत का आंकड़ा 114 का है।
वरिष्ठ पत्रकारों का कहना -
वरिष्ठ पत्रकार रोहित गुप्त का कहना है कि दिल्ली व बिहार विधानसभा चुनाव से कांग्रेसनीत I.N.D.I.A. का व्यावहारिक रूप से बिखराव हो गया है। बीएमसी चुनाव कैसे लड़ा गया, यह इसका बड़ा उदाहरण है। दूसरी ओर उद्धव और राज ठाकरे के मेल ने गैर मराठी समाज को बिदकाने काम कर दिया। इससे उनका बचाखुचा। जनाधार भी आधा हो गया। परिणाम भी एग्जिट पोल के मुताबिक हो सकते हैं। वरिष्ठ पत्रकार समीर चौगांवकर कहते हैं कि उद्धव ठाकरे ने राज ठाकरे की मनसे के साथ समझौता करके बड़ी भूल की है। उन्होंने कहा कि विधानसभा और लोकसभा चुनाव उद्धव ठाकरे कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ते रहे हैं, लेकिन बीएमसी चुनाव में उन्होंने चचेरे भाई राज ठाकरे को साथी बनाया, जो उनके लिए बड़ी भूल साबित हो सकती है।
