सरस्वती शिशु मंदिर में मनाई गई रानी दुर्गावती व रोशनलाल जी की जन्म जयंती
News Desk, A. Anand, सिंगरौली, MP.
गुरुवार, 5 अक्टूबर 2023 को सरस्वती शिशु मंदिर बिलौजी बैढ़न में वीरांगना रानी दुर्गावती एवं सरस्वती शिशु मंदिर के जनक स्वर्गीय रोशन लाल जी सक्सेना की जन्म जयंती मनाई गई।
इस कार्यक्रम में विद्यालय के प्राचार्य रामभुवन द्विवेदी ने उक्त दोनों की प्रतिमा पर पुष्पार्चन करते हुए अपने उद्बोधन दिए।

इनके जन्म जयंती पर विद्यालय द्वारा घोषदल के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
रानी दुर्गावती का जन्म 5 अक्टूबर सन 1524 को महोबा में हुआ था। दुर्गावती के पिता महोबा के राजा थे। रानी दुर्गावती सुन्दर, सुशील, विनम्र, योग्य एवं साहसी लड़की थी। महारानी दुर्गावती कालिंजर के राजा कीर्तिसिंह चंदेल की एकमात्र संतान थीं। बांदा जिले के कालिंजर किले में 1524 ईसवी की दुर्गाष्टमी पर जन्म के कारण उनका नाम दुर्गावती रखा गया। नाम के अनुरूप ही तेज, साहस, शौर्य और सुन्दरता के कारण इनकी प्रसिद्धि सब ओर फैल गयी।

विद्या भारती के तहत संचालित सरस्वती स्कूलों को मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बाद में देश के कई राज्यों में शुरू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले रोशनलाल सक्सेना का जन्म 5 अक्टूबर 1931 को हुआ था। उन्होंने रीवा से गणित में एम.एस.सी. किया। 1943 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में गटनायक, गणशिक्षक, मुख्यशिक्षक, रीवा नगर कार्यवाह आदि उत्तरदायित्वों का निर्वाह किया।
12 फरवरी 1959 में बसंत पंचमी को एक धर्मशाला के छोटे से कमरे में पहला सरस्वती शिशु मंदिर प्रारंभ हुआ जिसकी प्रबंध समिति के रोशनलाल सचिव थे। धीरे धीरे विन्ध्य क्षेत्र में शिशु मंदिरों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। तब विंध्य क्षेत्र की प्रांतीय इकाई बनाकर उसमें हर जिले को प्रतिनिधित्व दिया गया।
इस कार्यक्रम को यादगार बनाने एवं सफल संचालन में विद्यालयीन आचार्य परिवार एवं भैया बहनों की अहम भूमिका रही।
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