सर्वे में कांग्रेस के सी‌एम कैंडिडेट कमलनाथ के पक्ष में 44 फीसदी लोग

शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ में 8 फीसदी मतों का हो सकता है अंतर, भाजपा को 230 में 110 से 120 व कांग्रेस को 101 से 110 सीटों का दिया आंकड़ा, अन्य दलों के खाते में जा सकती हैं 5 से 10 सीटें.

Editorial Desk @rohitgupta

मध्यप्रदेश में इस साल के अंत में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी सरगर्मी जोर पकड़ चुकी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दल मध्यप्रदेश में अपनी-अपनी सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं और इसके लिए वे मतदाताओं को लुभाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।

इन दलों के दावों को धरातल पर परखने के लिए न्यूज़ चैनल IBC24 ने जनता की नब्ज टटोलने के लिए ऑफ लाइन और ऑन लाइन माध्यम से करीब साढ़े 25 हजार लोगों से उनकी राय जानी। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि मध्यप्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। आज मध्यप्रदेश में चुनाव हुए तो साधारण अंतर से ही सही भारतीय जनता पार्टी सरकार बना सकती है।

करीब साढ़े 25 हजार सैंपल साइज से मिले आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार में वापसी हो सकती है। सर्वे कर्ताओं ने लोगों से पूछा कि अगर आज चुनाव हुए तो वे किस पार्टी को वोट देंगे? इस सवाल के जवाब में 52 फीसदी लोगों ने भाजपा को जबकि 44 फीसदी लोगों ने कांग्रेस को वोट देने की बात कही है। जबकि 4 फीसदी लोगों ने अन्य पार्टी पर भरोसा जताया है। इस आधार पर 230 सदस्यीय मध्यप्रदेश विधानसभा में भाजपा को 110 से 120 सीट मिल सकती है जबकि कांग्रेस के खाते में 101 से 110 सीटें आ सकती हैं। वहीं अन्य पार्टियों की झोली में 5 से 10 सीटें जा सकती हैं।

पसंदीदा मुख्यमंत्री कौन ?

वहीं मुख्यमंत्री के रूप में मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और कमलनाथ के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। मुख्यमंत्री के तौर पर 49 फीसदी लोगों ने शिवराज सिंह चौहान को, जबकि 44 फीसदी लोगों ने कमलनाथ को अपनी पसंद बताया। वहीं 7 फीसदी लोग किसी अन्य को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं।

मोदी अब भी भारी..

वहीं प्रधानमंत्री पद के लिए मध्यप्रदेश के लोगों के लिए भी नरेंद्र मोदी पहली पसंद बने हुए हैं। 68 फीसदी लोग नरेंद्र मोदी को जबकि 30 फीसदी लोग राहुल गांधी को प्रधानमंत्री बनाना चाहते हैं।
वहीं सर्वे से यह बात उभर कर सामने आई कि लोग वोट देते समय सबसे ज्यादा प्रत्याशी को महत्व देते हैं। लोगों से पूछा गया कि वे पार्टी, प्रत्याशी या फिर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार में से किसको देखकर वोट देंगे तो 43 फीसदी लोगों ने प्रत्याशी को अपनी पहली प्राथमिकता बताया। जबकि 25 फीसदी लोगों ने पार्टी को वहीं 15 फीसदी लोगों ने मुख्यमंत्री के चेहरे के आधार पर वोट देने की बात कही। वहीं मुद्दों के आधार पर 16 फीसदी जबकि जाति देखकर महज 1 फीसदी लोग वोट देना चाहते हैं।

इसके अलावा सर्वे का एक महत्वपूर्ण सवाल भाजपा और कांग्रेस की ओर से जनता को लुभाने के लिए किए जा रहे वादों से जुड़ा था। जनता से पूछा गया कि वे कांग्रेस की ओर से किए जा रहे किस वादे से प्रभावित होकर अपना वोट देंगे। इस सवाल के जवाब में मिले नतीजे बताते हैं कि सबसे ज्यादा 37 फीसदी लोगों को किसानों की कर्जमाफी का मुद्दा भाया है। वहीं 29 फीसदी लोगों को 500 रुपए में गैस सिलेंडर, 27 फीसदी लोगों को पुरानी पेंशन बहाली जबकि 7 फीसदी लोगों को महिलाओं को 18 हजार रुपए देने के वादे ने लुभाया है। वहीं शिवराज सरकार की गेम चेंजर मानी जा रही लाडली बहना योजना को सर्वे में भी जोरदार रिस्पांस मिला है। 51 फीसदी लोगों को लाडली बहना योजना पसंद आई है, जबकि 24 फीसदी लोगों को लाडली लक्ष्मी -2 योजना और 25 फीसदी लोगों ने सीएम रोजगार योजना पर मुहर लगाई है।

वहीं जब लोगों से पूछा गया कि पिछले चुनावों में किए गए वादे क्या पूरे हुए हैं तो इसके नतीजे सरकार के लिए आंख खोलने वाले मिले हैं। 45 फीसदी लोगों ने वादे पूरे नहीं होने की बात कही है जबकि 19-19 फीसदी लोगों ने औसत और पूरे होने की बात कही। जबकि 17 फीसदी लोगों ने माना कि आधे वादे पूरे हुए है। वहीं जब लोगों से पूछा गया कि बीते पांच सालों में उनके क्षेत्र में हुए विकास कार्यों से क्या आप संतुष्ट हैं तो 51 फीसदी लोग असंतुष्ट नजर आए। जबकि 22 फीसदी लोगों ने बहुत अच्छा और 18 फीसदी लोगों ने अच्छा विकास बताया।

अपेक्षित विकास नहीं होने के लिए लोगों ने सबसे ज्यादा विधायक को जिम्मेदार ठहराया है। सर्वे में शामिल लोगों में से 53 फीसदी लोगों ने विधायक को, 30 फीसदी लोगों ने राज्य सरकार को, 03 फीसदी लोगों ने केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि 14 फीसदी लोगों ने कोई राय जाहिर नहीं की।

आपको बता दें कि IBC24 ने ऑफलाइन और ऑन लाइन दोनों माध्यमों के जरिए लोगों की राय जानने की कोशिश की। वहीं चैनल ने डिजिटल प्लेटफार्म के जरिए भी लोगों से ऑनलाइन उनकी राय जानी। इनमें से करीब 25 हजार लोगों की राय को सर्वे में शामिल किया। जबकि सैंपल साइज इससे भी बड़ा था, पर सर्वे के नतीजों को प्रामाणिकता की कसौटी पर खरा उतारने के लिए उन फार्म को सर्वे में शामिल नहीं किया गया, जिन्हें लोगों ने आधे-अधूरे या एक से ज्यादा विकल्पों को भर दिया था। जिनके फोन नंबर, पता या पहचान संदिग्ध नजर आए उन्हें भी गणना से बाहर कर दिया गया।

इस तरीके से फिल्टर करने के बाद 25 हजार से ज्यादा के सर्वे सैंपल साइज के आधार पर ये रुझान सामने आए हैं। पिछले चुनावों में भी IBC24 के चुनाव से पूर्व सर्वे के नतीजे चुनाव परिणामों के बिल्कुल करीब पाये गये थे।

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