Explanation; महिला भृत्य ने चोटिल एसडीएम के जूते का मानवतावश बांधा था फीता

Newspost, State Desk. @RohitGupta

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। घटना 22 जनवरी की है। अयोध्या में भगवान राम के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर जिले के चितरंगी में हनुमान मंदिर में आयोजित किया गया था पूजा व आरती का कार्यक्रम। इसमें शामिल चोटिल एसडीएम चितरंगी के जूते का फीता कार्यालय की ही चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी मानवता और आदरवश बांधने लगी। इसकी फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मुख्यमंत्री डाॅ मोहन यादव ने इसे नारी का अपमान मानते हुए चितरंगी एसडीएम को तत्काल हटाने के निर्देश दे दिये। कलेक्टर सिंगरौली अरुण परमार ने निर्देश का पालन किया और एसडीएम चितरंगी रहे असवन राम चिरावन को अटैच कर नवीन पदस्थापन कर दिया।

आइए जानते हैं कि सच्चाई क्या है ?

बताया जाता है कि 22 जनवरी को चितरंगी के हनुमान मंदिर में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के शुभ अवसर पर आयोजित पूजा व आरती कार्यक्रम में राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह के साथ एसडीएम चितरंगी असवन राम चिरावन भी शामिल हुए थे। वहां एक चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी द्वारा उनके जूते का लेस बांधते हुए तस्वीर सोशल मीडिया में वायरल हो गई। इसको संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने आज तत्काल हटाने का निर्देश दिया।

जूते में लेस बांधने की वायरल तस्वीर से संबंधित तथ्य

घटना के संबंध में एसडीएम असवन राम चिरावन ने स्पष्टीकरण देते हुए बताया कि गत 30 दिसम्बर को डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला गोपद नदी के निर्माणाधीन ब्रिज कार्य के अवलोकन के लिए आये थे। वहां भू अर्जन अधिकारी व एसडीएम होने के नाते मौजूद थे और अवलोकन के दौरान वहां एक सरिया में उनका पैर फंस गया और वे गिर गए थे जिससे उनके पैर के घुटनों में गंभीर चोट आई थी। एसडीएम चिरावन ने आगे बताया कि चोट की वजह से उन्हें चलने में कठिनाई होती है। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में वे अपने कार्यालय के अधीनस्थ कर्मचारियों के सहयोग से गए थे। वहां जूते को उतार कर आरती में शामिल हुए और वापसी के समय उन्होंने जूते को जैसे तैसे पहन तो लिया लेकिन लेस नहीं बांध पाए और चलने लगे। इसी बीच लेस जूते के नीचे फंस गया और वे अनियंत्रित होकर गिरने की स्थिति में आ गए। मेरी इस परेशानी को देख रही मेरे ही कार्यालय में पदस्थ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी निर्मला देवी ने मेरे मना करने के बाद भी मानवतावश जूते के नीचे दबे लेस को केवल निकाला था ताकि वह दोबारा जूते के नीचे ना फंसे। इसका फ़ोटो किसी ने सोशल मीडया में वायरल कर दिया और लिख दिया कि चितरंगी एसडीएम ने महिला से जूते बंधवाकर नारी का अपमान किया है। जबकि सच्चाई इससे अलग है। इसी संबंध में महिला ने भी अपना पक्ष रखते हुए कहा कि मैं उसी कार्यालय की कर्मचारी हूँ और एसडीएम साहब मेरे अधिकारी होने के अलावा वह पिछले एक पखवाड़े से दोनों घुटनों में लगे चोट से पीड़ित हैं। इसकी जानकारी लगभग सभी को है। मैंने केवल मानवता वश सर के जूते के लेस जो जूते के नीचे दब गए थे उसे निकाला। क्योंकि साहब झुक नहीं पा रहे थे।

ऐसी कार्यवाही से गिरेगा अधिकारियों का मनोबल

मुख्यमंत्री द्वारा चितरंगी एसडीएम को हटाने के दिए गए निर्देश से सन्न है और दबे जुबान कहने को मजबूर हैं कि वाट्सअप व फेसबुक पर परोसे गए फ़ोटो, वीडियो व अन्य कमेंट्स पर बिना जांच पड़ताल के इस तरह की कार्यवाही अधिकारियों का मनोबल गिराने का काम करेगा। एसडीएम चितरंगी चोटिल हैं यह बात सिंगरौली कलेक्टर सहित चितरंगी एसडीएम कार्यालय व अन्य विभाग के अधिकांश लोग जानते हैं। बावजूद बिना सच्चाई का पता लगाए मुख्यमंत्री द्वारा तत्काल हटाने का निर्देश समझ से परे है। बरहाल मुख्यमंत्री के इस कार्यवाही से अधिकारी वर्ग, जन प्रतिनिधि व आम लोग आवाक जरूर हैं।

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