WCL CBI Case: रिश्वत मामले के आरोपी प्रबंधक (वित्त) एवं लिपिक (E & M) को सीबीआई के स्पेशल कोर्ट ने दिया 5-5 साल का कारावास, ₹ 20-20 हजार अर्थदंड भी लगाया

Newspost, Corporate Desk.

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा बीते दिनों नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) मुख्यालय के कुछ अधिकारियों एवं सैकड़ों करोड़ के स्पेयर आपूर्ति घोटाले में गिरफ्तार एक संविदाकार/सप्लायर की जमानत अर्जी को सीबीआई की विशेष अदालत ने ठुकरा दिया। सीबीआई ने प्रकरण को अति गंभीर बताया है। इस मामले में एनसीएल के दो डायरेक्टर्स के नामों के उजागर होने की भी चर्चा है।

क्या है यह मामला ?

सीबीआई की दिल्ली से भेजी गई 22 सदस्यीय टीम द्वारा बीते 16.08.2024 को एसीबी जबलपुर में पदस्थ डिप्टी एसपी जॉय जोसेफ दामले एवं एमपी पुलिस के जबलपुर में पदस्थ एक सब इंस्पेक्टर को रंगे हाथों पकड़ा गया था। ये लोग नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के सैकड़ों करोड़ के घोटाले की शिकायत को रफा दफा करने के लिए ₹ 5 लाख के घूस की राशि का लेन देन करते पकड़े गए थे। डीएसपी दामले की ट्रैपिंग के बाद यह मामला हाई लेवल का हो गया और सीबीआई दिल्ली ने इसे संज्ञान में लेकर 22 सदस्यीय दल सिंगरौली भेज दिया। यह टीम एनसीएल मुख्यालय पहुंची और अपने पूर्व निर्धारित रणनीति के तहत सीएमडी सचिवालय में पदस्थ उप प्रबंधक, कंपनी के सुरक्षाधिकारी, जयंत में निवासरत एक सप्लायर के घर व दफ्तर को खंगाला तथा इन सभी से तथा कुछ अन्य संलिप्त लोगों के बयान दर्ज किए। इस दौरान इन लोगों के कब्जे से लगभग 4 करोड़ नकदी, कुछ दस्तावेजों के साथ ही कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त किये जाने की जानकारी सीबीआई दिल्ली ने साझा की। सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर सीबीआई उन्हें जबलपुर ले गई जहाँ विशेष न्यायालय में ट्रायल शुरू हो चुका है।

चुंकि रिश्वत की यह रकम ठेकेदार रविशंकर सिंह के निर्देश पर उसके कर्मचारी अजय वर्मा द्वारा लेफ्टिनेंट कर्नल बसंत कुमार सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्य प्रबंधक (प्रशासन), एनसीएल, सिंगरौली से प्राप्त किया गया था। रिश्वत की रकम कथित तौर पर सीएमडी सचिव सूबेदार ओझा द्वारा भेजी गई थी और 17.08.24 को रविशंकर सिंह ने दिवेश सिंह को यह रकम डीएसपी सीबीआई दामले तक पहुंचाने का निर्देश दिया था। इसलिये ये पूरा नेक्सस अब सीबीआई की हिरासत में है।

सीबीआई ने एनसीएल केस में पीसी एक्ट (जैसा कि 2018 में संशोधित) की धारा 7, 7ए, 8 के साथ भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत एक नियमित मामला (i) रविशंकर सिंह, मेसर्स संगम इंजीनियरिंग, सिंगरौली (मप्र) के निदेशक के खिलाफ पंजीकृत किया गया था;  (ii) लेफ्टिनेंट कर्नल बसंत कुमार सिंह (सेवानिवृत्त), प्रबंधक (प्रशासन), एनसीएल, सिंगरौली, (iii) सूबेदार ओझा, प्रबंधक (सचिवालय), एनसीएल, सिंगरौली; (iv) दिवेश सिंह, निजी व्यक्ति (रविशंकर सिंह का सहयोगी); (v) जॉय जोसेफ दामले, उप पुलिस अधीक्षक, सीबीआई, एसीबी, जबलपुर, अन्य अधिकारी और अन्य अज्ञात के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया था।

स्पेशल कोर्ट ने खारिज की रविशंकर सिंह की जमानत ‌अर्जी

रवि सिंह की पहली नियमित जमानत याचिका को स्पेशल कोर्ट सीबीआई, जबलपुर के माननीय न्यायाधीश रूपेश कुमार गुप्ता की अदालत ने खारिज कर दिया है। माननीय कोर्ट ने माना है कि यह एक गंभीर अपराध है। इस प्रकरण से जुड़े कुछ आरोपी फरार हैं, ऐसे में यह जमानत स्वीकार करने योग्य नहीं है। कोर्ट ट्रायल के दौरान रवि सिंह ने एनसीएल के दो डायरेक्टर्स का भी नाम लिया है। ये निदेशक कौन हैं और इनकी इस केस में किस तरह से संलिप्तता है, इस बाबत फिलहाल कोई स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं हो सकी है। (सूत्र)

आदेश की साझा प्रति देखें-(यह एक सूत्र से प्राप्त प्रति है, newspostglobal इसकी पुष्टि नहीं करता).

WCL: घूसखोरी कांड के एक मामले में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंधक (वित्त) व तत्कालीन क्लर्क (ई & एम) सहित दो आरोपियों को 5 वर्ष कारावास एवं जुर्माने की सजा

विशेष न्यायाधीश केलापुर ने घूसखोरी से संबंधित एक मामले में डब्ल्यूसीएल के दो आरोपियों- माणिकलाल पॉल तत्कालीन प्रबंधक (वित्त), एवं अविनाश मारोतराव काकड़े तत्कालीन क्लर्क (ई एंड एम) कार्यालय मुख्य प्रबंधक (ई & एम), डब्ल्यूसीएल नीलजाई नॉर्थ ओपन कास्ट माइन को 5 वर्ष की कारावास के साथ संयुक्त रूप से दोनों आरोपियों को 20-20 हजार रु. जुर्माने की सजा सुनाई है।
सीबीआई ने आरोपियों माणिक लाल पॉल तत्कालीन प्रबंधक (वित्त), नीलजाई क्षेत्र वानी उपक्षेत्र डब्ल्यूसीएल एवं अविनाश मारोतराव काकड़े, तत्कालीन क्लर्क नीलजाई उपक्षेत्र के विरुद्ध दिनांक 06.05.2014 को मामला दर्ज किया था। आरोप था कि इन आरोपियों ने एक एम्बुलेंस की मरम्मत व आरटीओ पासिंग से संबंधित शिकायतकर्ता के बिलों को पास करने और उन्हें पुनर्सत्यापन हेतु क्षेत्रीय कार्यालय डब्ल्यूसीएल, वानी को न भेजने के लिए रिश्वत की मांग की एवं स्वीकार किया।
सीबीआई ने जाल बिछाया एवं आरोपियों को शिकायतकर्ता से अवैध रिश्वत मांगने एवं स्वीकार करने के दौरान रंगे हाथों पकड़ा। बाद में आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच पूरी होने के पश्चात दिनांक 20.01.2015 को विशेष न्यायाधीश केलापुर (महाराष्ट्र) की अदालत में आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया गया। अदालत ने विचारण के पश्चात, आरोपियों को दोषी ठहराया एवं तदनुसार उन्हें सजा सुनाई के।

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