📌कंपनी मुख्यालय में सीएमडी बी. साईराम ने निदेशक मंडल के साथ मीडिया को किया संबोधित

Newspost, Corporate Desk. Rohit Gupta.

सिंगरौली, मध्य प्रदेश। सोमवार, 24 जून ’24 को भारत सरकार की मिनीरत्न कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (CMD) बी.साईराम ने एनसीएल में सीएमडी का पदभार संभालने के बाद पहली बार प्रेस मीडिया से संवाद किया। प्रेस मीटिंग में सीएमडी साईराम के अतिरिक्त एनसीएल के निदेशक (कार्मिक) मनीष कुमार, निदेशक (वित्त) रजनीश नारायण, निदेशक (तकनीकी/संचालन) जितेंद्र मलिक, निदेशक (तकनीकी/परियोजना एवं योजना) सुनील प्रसाद सिंह भी इस वार्ता में शामिल रहे।

मीडिया को संबोधित करते हुए सीएमडी एनसीएल ने कहा कि एनसीएल ने देश की ऊर्जा संरक्षा में अहम योगदान देते हुए वित्त वर्ष 2023-24 में अपने 135 मिलियन टन के लक्ष्य से अधिक 136.15 मिलियन टन कोयला उत्पादन एवं 137.63 मिलियन टन कोयला प्रेषण (डिस्पैच) किया है।
बीते वर्ष की कंपनी की उपलब्धियों का विस्तार से चर्चा करते हुए श्री साईराम ने बताया कि एनसीएल ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में अधिभार हटाव में अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए पहली बार 500 मिलियन क्यूबिक मीटर के आंकड़े को पार किया व 513.6 मिलियन क्यूबिक मीटर अधिभार हटाया है। इस दौरान एनसीएल ने 'बिजली की बुनियाद' की अपनी भूमिका का बखूबी निर्वहन करते हुए 'बिजली घरों' को भारी मात्रा में 122.21 मिलियन टन कोयला प्रेषित किया है। इस दौरान गैर-विनियमित क्षेत्र (एनआरएस) को भी एनसीएल ने भरपूर मात्रा में कोयला आपूर्ति की है।

नेट ज़ीरो एनर्जी कंपनी बनने की दिशा में एनसीएल सौर ऊर्जा प्लांट की स्थापना कर रही है, जिसमें निगाही क्षेत्र में 50 मेगावाट के सोलर प्लांट का संचालन चालू हो गया है। एनसीएल 250 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा क्षमता के विकास के लिए भी तेजी से कार्य कर रही है। एनसीएल में सौर ऊर्जा क्षमता के विकास के लिए एक विशेष सेल का गठन भी किया गया है।

उन्होंने बताया कि एनसीएल अपना अधिकतर कोयला पर्यावरण अनुकूल माध्यम से प्रेषित करती है एवं वित्त वर्ष 2023-24 में कुल कोयला प्रेषण का लगभग 84 प्रतिशत कोयला हरित विधियों के माध्यम से उपभोक्ताओं को प्रेषित किया है। उन्होने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि कंपनी के विस्तार के लिए अहम 'पूंजीगत व्यय' के अंतर्गत एनसीएल ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में रु 2150 करोड़ पूंजीगत व्यय के लक्ष्य के सापेक्ष रु 3748.60 करोड़ खर्च किया है। एनसीएल सिंगरौली परिक्षेत्र में रोजगार मुहैया करवाने में भी अग्रणी है। इस कड़ी में वर्ष 2023-24 में भू विस्थापितों को 77 एवं अनुकम्पा में 101 नियुक्ति दी गईं हैं। साथ ही सीधी भर्ती द्वारा अलग-अलग संवर्गों में 691 भर्तियाँ की गईं हैं।
सीएमडी एनसीएल ने बताया कि कंपनी समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान के लिए सदैव प्रतिबद्ध है व कंपनी ने अपनी सीएसआर गतिविधिओं में स्वास्थ्य, कौशल विकास, रोजगार, खेल प्रोत्साहन, शिक्षा, सड़कों के निर्माण एवं कोविड से बचाव जैसे अनेक कार्यों पर विगत 10 वर्षों में 1031.15 करोड़ से अधिक खर्च किया है, जिससे 200 गाँव के 10 लाख से अधिक लोगों को लाभ पहुंचा है। साथ ही पिछले वित्त वर्ष में एनसीएल ने सीएसआर के तहत रु 157.87 करोड़ खर्च किया है। सीएमडी ने इस अवसर पर एनसीएल की विभिन्न सीएसआर पहलुओं को विस्तार से रखा।
उन्होंने बताया कि एनसीएल अपने 3 अस्पताल व 10 डिस्पेन्सरी के माध्यम से सिंगरौली परिक्षेत्र के सभी लोगो को बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाती है। साथ ही कंपनी के नेहरू शताब्दी चिकित्सालय (एनएससी) के आधारभूत संरचना का भी लगातार उन्नयन किया जा रहा है व नए चिकित्सकों की भर्ती भी की जा रही है। शीघ्र ही एनएससी में मदर चाइल्ड केयर की नयी यूनिट सभी के लिए अपनी सेवाएँ देने लगेगी।

पर्यावरण की बेहतरी व संरक्षण की दिशा में उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए सीएमडी एनसीएल ने बताया कि कंपनी ने स्थापना से लेकर अब तक 2.73 करोड़ वृक्षारोपण किया है। साथ ही एनसीएल वनीकरण की नई पद्धति ‘मियावाकी’ को भी अपना रही है। उन्होंने यह भी कहा कि एनसीएल भारत सरकार के ग्रीन क्रेडिट प्रोग्राम के अंतर्गत सक्रिय रूप से भाग लेकर उत्तर प्रदेश के 5 जिलों व मध्य प्रदेश के 3 जिलों में 300 हेक्टेयर भू-क्षेत्र के वनीकरण हेतु अनुदान उपलब्ध कराने की योजना पर भी कार्य कर रही है।

एनसीएल मिनी बेसिन में करेगी अंडरग्राउंड माइनिंग 

सीएमडी साईराम ने कंपनी की अन्य उपलब्धियों एवं भावी योजनाओं पर मीडिया से व्यापक बातचीत की और बताया कि एनसीएल को वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 139 मिलियन टन कोयला उत्पादन व प्रेषण के लक्ष्य दिये गए हैं। उन्होंने बताया कि निकट भविष्य में एनसीएल की वर्तमान परियोजनाएं जैसे निगाही, जयंत, ब्लॉक-बी, बीना-ककरी आदि का विस्तार किया जाएगा, जो नज़दीक़ी बिजली घरों की बढ़ती हुई जरूरत को पूरा करने में सहायक होंगी। साथ ही एनसीएल को आवंटित इंगुरी मिनी बेसिन कोल ब्लॉक का डीपीआर तैयार किया जा रहा है एवं आने वाले समय में वहाँ से भी भूमिगत खदानों द्वारा कोयला उत्पादन की शुरुआत होगी। यहाँ से 3-8 मि.टन कोयले का उत्पादन आगामी वर्षों में किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इन खदानों के लिए अधोसंरचना का विकास भी करना होगा।

एनसीएल मिनी बेसिन में करेगी अंडरग्राउंड माइनिंग-साईराम
सीएमडी साईराम ने एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि बढ़ती कोयला जरूरतों की पूर्ति के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसियों का सहयोग लाजिमी है। इससे सकल मुनाफे में वृद्धि की बात को भी उन्होंने स्वीकार किया और कहा कि एनसीएल में फिलहाल विभागीय उत्पादन की स्थिति बेहतर है। विदित हो कि एनसीएल कोल इंडिया की सर्वाधिक मेकेनाइज्ड कंपनी है। मोरवा शहर के विस्थापन के सवाल पर उन्होंने कहा कि जयंत के पास लाइव कोल स्टाक घटता जा रहा है। यहाँ के कोयले पर एनटीपीसी का शक्तिनगर प्लांट पूरी तरह से निर्भर है, फलतः जयंत का विस्तार करना जरूरी होगा। सीएमडी ने बताया कि मोरवा के सर्वे का काम आगामी डेढ़ से 2 साल में शुरू हो जाएगा।  

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