ट्रांसपोर्ट संगठनों के साथ गृह मंत्रालय में हुई सचिव स्तर की मीटिंग के बाद निकला हल

टाइमिंग और तरीके पर उठ रहे क‌ई सवाल

Newspost, Editorial Desk. @RohitGupta.

‘हिट एंड रन’ मामलों में आने वाले नये कानून (भारतीय न्याय संहिता) में इरादतन और गैर इरादतन घटना को परिभाषित कर दोनों के लिये अलग अलग दंड का विधान बनाया गया है। एक ओर कहा जा रहा है कि ड्राइवरों की हड़ताल किसी भी संगठन के आह्वान पर नहीं, वरन् ड्राइवरों ने सोशल मीडिया पर एक दूसरे को इसके लिए प्रेरित किया। यह बात गले से नीचे नहीं उतरती। बहरहाल मंगलवार को देर रात ट्रांस्पोर्ट संगठन के पदाधिकारियों को गृह मंत्रालय ने तलब किया। गृह मंत्रालय में ट्रांस्पोर्ट संगठन के लोगों के साथ हुई सचिव स्तर की बैठक के बाद ट्रांस्पोर्टरों ने संतोष जताते हुए कहा कि समस्या का समाधान हो गया है। यह कानून अभी लागू नहीं है, आगे भी इस रूप में लागू नहीं होगा। बहरहाल यह समस्या हल होती दिखाई दे रही है। लेकिन ड्राइवरों की अचानक, बिना वैधानिक सूचना के हड़ताल पर चले जाने की घटना पर अनेक सवाल भी खड़े हो गए हैं।

इस हड़ताल ने वर्ष 2019 में 15 दिसंबर से 9 फरवरी 2020 तक एन‌आरसी व सीएए को मुद्दा बनाकर हुए शाहीन बाग और केन्द्र की मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में 9 अगस्त 2020 से 11 दिसंबर 2021 तक देश की राजधानी दिल्ली को बंधक बनाकर रखने वाले कथित किसान आंदोलन की याद ताजा जरूर करा देती है। ड्राइवरों की हड़ताल विशेष कर भारत के उत्तरी राज्यों में असरदार तरीके से शुरू हुई। इस आंदोलन का तरीका और टाइमिंग भी चर्चा में है। इसका कारण भी है। इसी साल म‌ई – जून में लोकसभा के चुनाव होने हैं। इस चुनाव में मोदी को हर हाल में हराने और हटाने को प्रमुख मुद्दा बनाकर एकजुटता दिखाने की कवायद कर रहे गैर एनडीए दलों के गठजोड़ ‘इंडी अलायंस’ को हाल ही संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। तीन बड़े राज्यों- मध्य प्रदेश, राजस्थान व छत्तीसगढ़ में बीजेपी की भारी बहुमत से सरकार बन गई। दूसरी ओर लगभग 500 साल बाद भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद भव्य राम मंदिर का तेजी से चल रहा काम और इसी 22 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की यजमानी में रामलला की होने वाली प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम को लेकर देश में सनातनी फिजा बन रही है।

ऐसे में तीन महीने बाद शुरु होने वाले लोकसभा चुनाव के काउंट डाउन से विपक्ष यानी इंडी अलायंस का बेचैन होना स्वाभाविक ही है। यह हम नहीं कह रहे, यह चर्चा में है। यह भी कहा जा रहा है कि मंहगाई और आम जनता की परेशानी को बढ़ाकर मोदी सरकार की छवि को धूमिल करने की योजना के तहत की ग‌ई ड्राइवरों की हड़ताल। कुछ और सवाल भी चर्चा में हैं जैसे- इस हड़ताल को लंबा खींचने की योजना बनाई गई थी ? अयोध्या में भगवान की प्राण प्रतिष्ठा से आमजन का ध्यान भटकाने के लिये यह हड़ताल करवाई गई ?

बहरहाल गृह मंत्रालय भारत सरकार के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि बुधवार से वाहनों के पहिए अपने सामान्य गति से फिर से सड़कों पर चलने लगेंगे। हालांकि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी दो जनहित याचिकाओं की त्वरित सुनवाई की। इस विषय में एडवोकेट जनरल द्वारा मीडिया को बताया गया है कि मा. हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को इस हड़ताल को हर हाल में समाप्त कराने के निर्देश दिए हैं।

 

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