Newspost, Spiritual Desk. Swami Dayanand Sharma.
"जिम्मेदारी एक उपहार है — जो हमें तब मिलता है जब हमारी निष्ठा, ईमानदारी और क्षमता पर गहरा विश्वास किया गया हो।" यह यूँ ही नहीं दी जाती। यह तब सौंपी जाती है, जब हमारा व्यवहार बार-बार यह सिद्ध करता है कि हम भरोसे के योग्य हैं। जब हमारे कर्म पारदर्शी होते हैं, जब हम अपने कर्तव्यों के प्रति समर्पित रहते हैं, और हमारे संकल्प डगमगाते नहीं — तब समाज या संगठन हमें बड़ी जिम्मेदारियाँ सौंपने में संकोच नहीं करता।
"जिम्मेदारी को केवल एक बोझ समझना, उसकी गरिमा का अपमान है।" असल में, यह एक अवसर है — खुद को सिद्ध करने का मंच। हर दायित्व हमें यह मौका देता है कि हम अपने व्यवहार और कार्यशैली से यह साबित करें कि हम दूसरों के विश्वास के योग्य हैं। जब हम कोई काम पूरी निष्ठा और दक्षता से निभाते हैं, तब वह केवल एक कार्य नहीं रहता — वह हमारे आत्मबल, नेतृत्व और मूल्यों का प्रमाण बन जाता है।
"अधिकार कभी किसी याचना से नहीं मिलते — वे हमारे निभाए गए कर्तव्यों का प्रतिफल होते हैं।" जब हम वर्षों तक बिना थके, बिना शिकायत के, ईमानदारी से अपने उत्तरदायित्व निभाते हैं — तब अधिकार हमारे जीवन में उसी तरह सहज रूप से आते हैं, जैसे वटवृक्ष पर ऋतु आने पर फल लगते हैं।
जिम्मेदारी को निभाना आत्मनिर्माण की प्रक्रिया है — और अधिकार, उस यात्रा का स्वाभाविक परिणाम।
🎯संतश्री
