?️?? शुभ प्रभात ???️

सोमवार, 9 अक्तूबर, संत वाणी, आज का संदेश.

Shared by : Swami Dayanand Sharma.

           'प्रसन्न चित्त व्यक्ति में रचनात्मक शक्ति अधिक होती है। अनियंत्रित क्रोध विनाश और नियंत्रित क्रोध विकास का कारण बन सकता है इसलिये क्रोध को अपने ऊपर हावी न होने दें।'

        'क्रोध किसी भी व्यक्ति का स्वभाव नहीं है। यह एक अर्जित विकार है। बड़े आश्चर्य की बात है कि मनुष्य शांत और सहज क्यों नहीं रहना चाहता। शांत और सहज रहने में जो आनंद है, जो सुख है,वह अशांत हो जाने पर कैसे हो सकता है?'

        "जो व्यक्ति क्रोध करता है वह अपनी किसी भूल से क्रोध नहीं करता, हमेशा दूसरे की भूल से क्रोध करता है। भूल दूसरा करता है और क्रोधी व्यक्ति अपने को सजा देने लगता है।"

      'क्रोध आने का प्रमुख कारण व्यक्तिगत या सामाजिक अवमानना है। उपेक्षित तिरस्कृत समझे जाने वाले लोग अधिक क्रोध करते हैं। क्योंकि वे क्रोध जैसी नकारात्मक गतिविधि के द्वारा भी समाज को दिखाना चाहते है कि उनका भी अस्तित्व है।'

काम, क्रोध, मद, लोभ, सब, नाथ नरक के पंथ।
सब परिहरि रघुबीरहि, भजहुँ भजहिं जेहि संत।

? आपका दिन शुभ मंगलमय हों! ?

??Hava a Cool Nice Day??

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