रेडक्रॉस की ट्रेनिंग में भेजे गए शिक्षक को भी नोटिस देने से मामला गरमाया
Newspost, Regional Desk. सिंगरौली। Report – Dharmendra Kumar Sahu.
जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली ने निर्वाचन कार्य में सहयोग न करने पर तीन शिक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। ये तीनों शिक्षक बीएलओ (BLO) के रूप में नियुक्त थे, लेकिन निर्वाचन संबंधी दायित्वों का निर्वहन न करने पर कार्रवाई की गई है।

नोटिस प्राप्त शिक्षकों के नाम –
रमाकांत मिश्रा, माध्यमिक शिक्षक, कन्या स्कूल निवास, रामकुमार सिंह, माध्यमिक शिक्षक, पिपरी, अरुण कुमार साहू, माध्यमिक शिक्षक, हायर सेकेंडरी स्कूल निवास। ये तीन शिक्षक हैं जिन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी ने निर्देश दिया है कि सभी शिक्षक निर्धारित समय सीमा में अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें, अन्यथा आगे की विभागीय कार्यवाही की जाएगी।
अलग है शिक्षक अरुण कुमार साहू का मामला
निर्वाचन कार्य में लापरवाही पर प्रशासन ने सख्ती जरूर दिखाई है। लेकिन वास्तव में शिक्षा व निर्वाचन विभाग के अधिकारियों में तालमेल और उनकी ही लापरवाही का मामला अब चर्चा में है। इसे कर्मचारी को प्रताड़ित करने का नया तरीका या प्रशासनिक लापरवाही कुछ भी माना जा सकता है।
जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली द्वारा माध्यमिक शिक्षक एवं बी.एल.ओ. अरुण कुमार साहू, शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल निवास को दो अन्य शिक्षकों के साथ निर्वाचन कार्य में सहयोग न करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

लेकिन इस मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। माध्यमिक शिक्षक अरुण कुमार साहू द्वारा इस विषय में एक विभागीय पत्र दिखाते हुए बताया गया कि, “मुझे 25 से 31 अक्टूबर तक रेड क्रॉस प्रशिक्षण हेतु अमरकंटक के लिए जिला शिक्षा अधिकारी एवं संकुल प्राचार्य द्वारा विधिवत मुक्त किया गया था। हमारे पास इस आदेश की प्रति भी उपलब्ध है।”
शिक्षक के अनुसार, इसी अवधि में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा 31 अक्टूबर को नोटिस जारी किया गया, जिसमें आरोप लगाया गया कि उन्होंने निर्वाचन कार्य में सहयोग नहीं किया।
अब सवाल उठता है कि जब अधिकारी स्वयं प्रशिक्षण के लिए मुक्त करने का आदेश दे चुके थे, तो उसी अवधि में निर्वाचन कार्य से अनुपस्थित मानकर नोटिस कैसे जारी किया गया?
शिक्षकों का कहना –
स्थानीय शिक्षकों का कहना है कि यह मामला न केवल प्रशासनिक भ्रम का प्रतीक है, बल्कि यह किसी कर्मचारी को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने का उदाहरण भी हो सकता है। शिक्षक वर्ग का यह भी कहना है कि यदि कोई अधिकारी स्वयं कर्मचारी को एक सरकारी प्रशिक्षण हेतु भेजता है, तो उसी अवधि में किसी अन्य कार्य में अनुपस्थित बताना उचित नहीं है।
अब देखना यह है कि इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी सिंगरौली क्या जवाब देते हैं और क्या इस नोटिस को वापस लिया जाएगा या नहीं।
एक तरफ प्रशिक्षण का आदेश, दूसरी ओर नोटिस- आखिर गलती किसकी है? रेड क्रॉस प्रशिक्षण में गए शिक्षक को निर्वाचन कार्य से अनुपस्थित बताकर नोटिस जारी किया जाना एक गंभीर विषय है। मामले की जांच की मांग तेज हो गई है।
