Newspost, MP State Desk. सिंगरौली, मध्य प्रदेश।
शहर से ग्रामीण अंचल तक ‘सड़क’ बना बड़ा नागरिक मुद्दा, सड़क की मांग को लेकर सड़क पर उतरीं महिलाएं, पंचायत राज्य मंत्री व सांसद से लगाई गुहार

एमपी का कमाऊ जिला सिंगरौली के आम नागरिक कॉरपोरेट कंपनियों की चालबाजी, प्रदूषण और बुनियादी आवश्यकताओं के लिए जूझ रहे हैं। इस जिले में 13 साल बीत जाने के बाद भी अब तक राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 39 नहीं बन सका है। इसके साथ साथ विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के शहरी एवं ग्रामीण अंचलों में व्याप्त अन्य तमाम समस्याओं को लेकर तो आवाज उठती ही रही है, फिलहाल 'सड़क' की कमी अथवा उसकी दुर्दशा नागरिक समस्याओं की तालिका में शीर्ष पर है। विधानसभा क्षेत्र देवसर की ग्रामीण सड़कों को लेकर महिलाओं का प्रदर्शन, वायरल हुआ वीडियो और जनप्रतिनिधियों के रवैया की चर्चाएं अभी थमी नहीं हैं। इसी बीच अब चितरंगी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत धवई का छुरदा टोला सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है।
इस टोले के आदिवासी व अन्य परिवार सड़क के अभाव में तरह तरह के संकट झेलते बताए जा रहे हैं। सड़क की समस्या को लेकर काजल शाह ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल करते हुए मांग किया है कि छुरदा टोला में कई महिलाएं गर्भवती हैं जिनकी डिलेवरी का समय भी निकट है। गर्भावस्था की अवधि में वे रोड नहीं होने की वजह से अस्पताल तक कठिनाई से पहुंच पाती हैं। इन महिलाओं ने पंचायत एवं ग्रामीण राज्य मंत्री राधा सिंह एवं सांसद सीधी सिंगरौली डॉ राजेश मिश्रा से तत्काल रोड बनवाने का मांग की है।
रोड नहीं तो वोट नहीं -
वीडियो में काजल शाह ने तल्ख अंदाज में कहा है कि ‘चुनाव के समय आप लोग घर-घर पहुंच लेते हैं लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद आपको इन गरीबों के मूलभूत आवश्यकताओं का ध्यान नहीं रहता। अगर इस बार रोड नहीं बनी तो वोट नहीं मिलेगा।’ उन्होंने बताया है कि ‘घनी आबादी से सड़क की दूरी करीब 2 किलोमीटर है। अगर कोई बीमार हो जाए या गर्भवती महिलाओं को अस्पताल की जरूरत पड़े तो हॉस्पिटल तक पहुंचाने के लिए खाट का सहारा लेना पड़ता है।’
