आज का संदेश !!

Newspost, Spiritual Desk. Presenter- Swami Dayanand Sharma.

    मनुष्य जैसा विचार करता है वह ठीक वैसा ही बन जाता है। जिन जिन वस्तुओं का विचार तथा चिन्तन किया जावेगा वे वस्तुएँ निश्चित रूप से हमारे समीप चली आयेंगी। अतः जिसे हम प्राप्त करना चाहते हैं सदा उसी का विचार करें। इन्हीं विचारों में निर्मलता लाने के लिए दो महान गुणों की प्रशंसा हमारे शास्त्रों में भरी पड़ी है। वे हैं दया तथा क्षमा।

     दया के विचारों से निर्मलता आती है तथा क्षमा से निर्मलता को स्थिरता प्राप्त होती है। बिना दया तथा क्षमा का भाव रखे किसी को कभी शान्ति प्राप्त नहीं हो सकती। सद्विचार तथा सद्भाव ही हमारी सम्पत्ति हैं। जिस दिन तुम्हें विचारों की शक्ति का ठीक ठीक ज्ञान हो जावेगा उसी दिन अनेक शंकाएँ तथा समस्याएँ स्वतः हल हो जावेंगी। अच्छे कार्य करने से भी अच्छे विचारों की संस्कारवर्धक शक्ति अधिक तीव्र होती है।

   जैसी बातें मनुष्य विचारेगा कुछ समय के पश्चात् वह स्वयं देखेगा कि उसके विचारों के अनुकूल ही उसका वातावरण बनता जा रहा है। जिन जिन परिस्थितियों व वस्तुओं का उसने चिन्तन किया है वे उसके अधिकाधिक समीप आ पहुँचती हैं। मनुष्य अपने विचारों से ही उच्च तथा निम्न बनता है। विचार ही कार्य की प्रेरक शक्ति है विचार तथा कर्म का एक दूसरे से घनिष्ठ संबंध है।

सुरपति दास
इस्कॉन/भक्तिवेदांत हॉस्पिटल

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