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संपादक: रोहित गुप्त ‘मन’
वक्त के साथ चलना जरूरी नहीं
सत्य के साथ चलना सदा चाहिए
वक्त अच्छा बुरा चाहे जैसा भी हो
सत्य की ज्योति बुझनी नहीं चाहिए!!१
वक्त राजा बनाये या रंक बना दे
सत्य से दूर जाना नहीं चाहिए
सच की खातिर यदि त्यागना कुछ पडे़
हंसते हंसते उसे त्यागना चाहिए! !२
वक्त अच्छा हो खुद को नहीं भूलना
सत्य के साथ रहना तुम्हें चाहिए
यदि आये मुसीबत कभी आप पर
तब भी संयम में रहना तम्हें चाहिए !!३
सत्य के साथ ही वक्त हर पल रहा
वक्त को दोष देना नहीं चाहिए
सत्य ही सच्चिदानंद का रूप है
वक्त जैसा हो बस काटना चाहिए! !४
कवि/साहित्यकार:✒️
राजेन्द्र श्रीवास्तव
कानपुर, उत्तर प्रदेश (भारत).
(कवि सेवानिवृत शिक्षाविद हैं).
