Newspost, Spiritual Desk. Swami Dayanand Sharma.

सठ सन बिनय कुटिल सन प्रीति,|
सहज कृपन सन सुंदर नीति।
ममता रत सन ज्ञान कहानी,
अति लोभी सन बिरती बखानी।
क्रोधिहि सम कामिहि हरिकथा,

उसर बीज बए फल जथा।

   अर्थ: दुष्ट से विनय, कुटिल के साथ प्रीति, स्वाभाविक ही कंजूस से उदारता का उपदेश, ममता में फँसे हुए मनुष्य से ज्ञान की कथा, अत्यंत लोभी से वैराग्य का वर्णन, क्रोधी से शांति की बात और कामी से भगवान की कथा कहना... इनका वैसा ही फल होता है जैसा ऊसर (बंजर) में बीज बोने से होता है।

जीवन में कठोरता का भी अपना स्थान है। कभी-कभी जहाँ विनय काम नहीं आता वहाँ कठोरता काम कर जाती है। आपकी विनम्रता से किसी का अहित हो रहा हो तो उस विनम्रता से वो कठोरता कई गुना अधिक अच्छी है जिससे किसी का हित हो जाए।

ध्यान रखने योग्य: विनम्र रहें लेकिन जहाँ पर आपकी विनम्रता किसी श्रेष्ठ कार्य के साथ-साथ आपके व सामने वाले के हित में बाधक बन रही हो वहाँ पर थोड़ा कठोरता दिखाकर उस श्रेष्ठ कार्य की परिपूर्णता ही श्रेयस्कर हो जाती है। सीमेंट की तरह परिवार का मुखिया नर्म ना हो तो परिवार का जुड़ना कठिन है और सख्त ना हो तो परिवार का जुड़े रहना भी मुश्किल ही है।

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