🔸 ननि सिंगरौली के मोरवा नगर के विस्थापन को लेकर वीसी के माध्यम से हुई द्विपक्षीय बैठक
🔹एनसीएल मुख्यालय बैढ़न तथा विस्थापितों को भलुगढ़, गोंदवाली में बसाहट देने पर हुई चर्चा
🔸ड्रोन सर्वे के बाद किये गये निर्माणों का नहीं होगा मुआवजा निर्धारण
Newspost, National Desk.
गुरुवार को कोयला मंत्रालय के सेक्रेटरी, ज्वाइंट सेक्रेटरी, सीएमडी कोल इंडिया, सीएमडी एनसीएल व कोयला सेक्टर के अन्य पदाधिकारियों एवं सिंगरौली जिला प्रशासन के बीच नगर पालिक निगम सिंगरौली के मोरवा नगर के विस्थापन के संबंध में वीसी मीटिंग में बिंदुवार चर्चा की गई। प्रेस-मीडिया को प्राप्त जानकारी के अनुसार इस मीटिंग में एनसीएल मुख्यालय को सिंगरौली के जिला मुख्यालय वैढ़न ले जाने की बात कही गई। वहीं मोरवा पुनर्स्थापन मंच एवं सिंगरौली विस्थापन मंच के पदाधिकारियों को एनसीएल द्वारा दिये गए भरोसे के विपरीत मोरवा नगर के हजारों परिवारों को भलुगढ़ व गोंदवाली जैसे बुरी तरह से प्रदूषित ग्रामीण क्षेत्र में बसाहट दिये जाने का फिर से राग अलापा है। इस खबर के आम होने के साथ ही चर्चाओं का दौर चल पड़ा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कोयला मंत्रालय भारत सरकार के सचिव अमृत लाल मीणा, संयुक्त सचिव बीपी पति, कोल इंडिया के सीएमडी पीएम प्रसाद, संजय खरे कार्यकारी निदेशक भू राजस्व के द्वारा व्हीसी के माध्यम से एनसीएल की जयंत एवं दुद्धिचुआ परियोजनाओं के विस्तार हेतु धारा 9 (1) के तहत दिनांक 9 फरवरी 2024 को अधिग्रहण की गई अधिसचना के क्रियान्वयन एवं प्रगति की समीक्षा की गई। इस मीटिंग में कलेक्ट्रेट सभागार से संयुक्त रूप से कलेक्टर चन्द्रशेखर शुक्ला, एसडीएम सृजन वर्मा, सीएमडी एनसीएल बी.साईराम, निदेशक कार्मिक एनसीएल मनीष कुमार, महाप्रबंधक सिविल एनसीएल ए.के सिंह, महाप्रबंधक भू राजस्व एनसीएल श्री निरंजन भी जुड़े रहे।
व्हीसी में एनसीएल के सीएमडी बी. साईराम द्वारा सचिव, संयुक्त सचिव कोयला मंत्रालय सहित व्हीसी में जुड़े सभी अधिकारियों को बताया कि जयंत एवं दुद्धिचुआ विस्तारण परियोजना हेतु अधिग्रहण की गई भूमियों पर कार्य प्रगति पर है। जयंत सिंगरौली प्रोजेक्ट का विस्तारीकरण किया जा रहा है। जिसके तहत एनसीएल हेडक्वाटर के हर्रई वैढ़न तथा मोरवा टाउनशिप को भलुगढ़, गोंदवाली में स्थानांतरण की कार्यवाही की जायेगी। क्षेत्र का भौतिक सीमांकन ड्रोन के माध्यम से तथा परियोजना प्रभावित परिवार का सर्वे कराया जा चुका है। जो शीघ्र पोर्टल के माध्यम से सार्वजनिक सूचना एवं पारदर्शिता बनाये जाने हेतु पब्लिश भी कराया जायेगा। उन्होनें बताया कि विस्थापित परिवारों को पुर्नवास के लिए निर्धारित गाईड लाईन के अनुसार कार्यवाही की जायेगी तथा जिला प्रशासन के सहयोग से विस्थापित परिवारों को पुर्नवास कालोनी में प्लाट आवंटन आदि की कार्यवाही की जायेगी।
वहीं व्हीसी के माध्यम से सचिव कोल मंत्रालय मीना द्वारा निर्देश दिये गये कि जिला प्रशासन का सहयोग प्राप्त कर चरणबद्ध तरीके से विस्थापित परिवारों को आवास हेतु प्लाट आवंटन एवं पुर्नवास कालोनी का समुचित विकास किया जाय। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सरकार द्वारा जयंत एवं दुद्धिचुआ विस्तारण परियोजना हेतु अर्जन की गई भूमियों का धारा 9 (1) की कार्यवाही 9 फरवरी 2024 को की जा चुकी है एवं राजपत्र में प्रकाशन भी हो चुका है। अर्जित की गई भूमियों के क्षेत्र का ड्रोन सर्वेक्षण शासकीय अनुमति उपरांत किया जा चुका है एवं परिसम्पत्तियों की वस्तुस्थिति दर्ज की जा चुकी है। अतः दिनांक 9 फरवरी 2024 के बाद उक्त भूमियों पर किसी भी प्रकार का किया गया निर्माण अवैध माना जायेगा। इस प्रकार का कृत्य अवैधानिक एवं गैर कानूनी होगा। उन्होंने सिंगरौली कलेक्टर से इस कार्य में सहयोग की आपेक्षा की। साथ ही यह भी कहा कि बिना बल प्रयोग किये नियम कानून का प्रयोग कर पारदर्शी तरीके से पुनर्वासित लोगों को उचित मुआवजा प्रदान कराये जाने में सहयोग प्रदान करें।
कलेक्टर ने संबंधित क्षेत्र के लोगों से की अपील
व्हीसी के पश्चात कलेक्टर सिंगरौली चन्द्रशेखर शुक्ला के द्वारा विस्थापित हो रहे परिवारों एवं आम जनमानस से इस आशय की आपेक्षा गई की भारत सरकार द्वारा जयंत एवं दुद्धिचुआ विस्तारण हेतु मेढ़ौली, चटका, झिगुरदा, पंजरेह एवं चुरीदह ग्राम की जो भूमि अधिग्रहण के लिए धारा 9 का प्रकाशन भी हो चुका है। 9 फरवरी 2024 के बाद किसी भी प्रकार का उक्त भूमियों में अवैध निर्माण न करें क्योंकि उक्त भूमियों तथा परसम्पत्तियों का ड्रोन सर्वे तथा जियो टैगिंग के माध्यम से डेटा पूर्व में ही तैयार किया जा चुका है। जिला प्रशासन को सहयोग प्रदान करें।

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